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बमबम यादव

Mon, Dec 18, 2023

जनकपुर का प्रतिनिधि है जानकी महल, सीताराम विवाहोत्सव है मुख्य उत्सव

आठ दशक पूर्व सीता को बेटी के भाव से मानने वाले सुप्रसिद्ध उद्यमी मोहन बाबू ने जनकपुर के जानकीमहल की थी स्थापना

मोहन बाबू के गहन अनुराग के अनुरूप स्थापित जानकीमहल साधना के साथ सेवा का भी प्रमुख केंद्र सिद्ध हुआ

अयोध्या। साधना एवं सेवा के शीर्ष केंद्रों में शुमार जानकीमहल ट्रस्ट को रामनगरी में जनकपुर का प्रतिनिधि माना जाता है। सीताराम विवाहोत्सव के अवसर पर जानकीमहल की यह पहचान फलक पर होती है। यहां मां जानकी बेटी और श्रीराम का विग्रह दामाद के तौर पर स्थापित है। करीब आठ दशक पूर्व इसकी स्थापना मोहन बाबू के नाम से प्रसिद्ध देवरिया निवासी उद्यमी मोहनलाल केजरीवाल ने की थी।
मोहनलाल केजरीवाल संतों की उस उपासना परंपरा में दीक्षित थे, जो मां सीता को अनन्य मानकर श्रीराम की उपासना करते हैं। वह मां सीता को बेटी मानते थे और इसी भाव के अनुरूप उन्होंने अपनी सर्वस्व संपदा अर्पित करते हुए 1943 में जानकीमहल ट्रस्ट की स्थापना की। मोहन बाबू के गहन अनुराग के अनुरूप स्थापित जानकीमहल साधना के साथ सेवा का भी प्रमुख केंद्र सिद्ध हुआ।
जानकीमहल के ट्रस्टी एवं मोहन बाबू के दौहित्र के वंशज समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया के अनुसार चूंकि जानकीमहल की स्थापना किशोरी जी के महल के रूप में हुई, इसलिए यहां समस्त उत्सव मिथिला अथवा जनकपुर की परंपरा के अनुरूप संपादित होती है। भगवान की नित्य अष्टयाम सेवा भी मिथिला गायन पद्धति से युक्त होती है। जानकी जन्मोत्सव एवं राम विवाहोत्सव के अवसर पर भी जानकीमहल का मां जानकी से गहन सरोकार अर्पित होता है।
मां सीता परम ऐश्वर्य के साथ संवेदना और करुणा की अजस्र स्रोत के रूप में प्रतिष्ठापित हैं और आराध्य की इस महिमा के अनुरूप जानकी महल मां सीता एवं श्रीराम के मुख्य मंदिर के अलावा बजरंगबली, विघ्न विनाशक, शिव परिवार आदि के उप मंदिरों से भी युक्त है। मंदिर का भव्य प्रांगण साज-सुविधा युक्त शताधिक कमरों और अनेक सभागार से संपन्न है, जिसमें बराबर कथा-प्रवचन होते रहते हैं। मंदिर विशाल गोशाला से भी समृद्ध है।
मंदिर में कई दशक से अखंड सीताराम संकीर्तन भी संचालित है। जानकीमहल ट्रस्ट की ओर से गरीबों के लिए अन्न क्षेत्र और धर्मार्थ चिकित्त्सालय भी संचालित है।
जानकीमहल में सीताराम विवाहोत्सव अत्यंत भव्यता से मनाया जाता है। सीताराम विवाहोत्सव अगहन शुक्ल पंचमी को मनाया जाता है, किंतु यहां उत्सव का आरंभ द्वितीया को ही रामार्चा महायज्ञ, रामलीला मंचन और गणेश पूजन से होता है। तृतीया के दिन श्रीराम-सीता के प्रथम मिलन का प्रसंग फुलवारी की लीला के रूप में यहां पूरी जीवंतता से मनाया गया। यहां की फुलवारी लीला अपने आकर्षण के लिए प्रसिद्ध है। विवाहोत्सव के दिन भव्य बरात एवं अगले दिन कुंवर कलेवा के रूप में 56 भोग का अर्पण भी शानदार होता है। इस मौके पर दिलीप सुल्तानिया, नीता सुल्तानिया, अरुण सुल्तानिया, नरेश पोद्दार, मधुर चिरेनीवाल सहित पूरे देश से मारवाड़ी समाज के लोग सीताराम विवाह के दिव्य महोत्सव के साक्षी बनें।

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