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बमबम यादव
Sun, Jan 19, 2025
सेवा-संवेदना श्रीराम के जीवन का मर्म : मामा दास
राधिका सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में एक सप्ताह दीन दुखियों व असहायों को कंबल व च्यवनप्राश वितरण किया जा रहा
हनुमानजी महाराज के आशीर्वाद से कर रहें दीन दुखियों व असहायों की सेवा: सूर्यभान दास
अयोध्या। भगवान रामलला के पाटोत्सव की पुण्य बेला में प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी के महंत मामा दास, महंत सूर्यभान दास, महंत उपेंद्र दास, नागा लवकुश दास सहित दर्जनों नागा साधुओं ने रामनगरी में घूम घूम कर जरूरत मंदों दीन दुखियों व असहायों को कड़कड़ाते ठंड से बचने हेतु ऊनी कंबल व पतांजलि का च्यवनप्राश वितरण किया।नगरी के बस स्टैंड, राम की पैड़ी, लता मंगेशकर चौक, रेलवे स्टेशन व सरयू तट पर सर्द मध्य रात्रि में जाकर कंबल व पतांजलि का च्यवनप्राश वितरण किया। श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के शिष्य राधिका सेवा ट्रस्ट के सदस्य महंत मामा दास ने कहा कि सेवा-संवेदना सबसे बड़ा धर्म है और यही भगवान श्रीराम के भी जीवन का मर्म है। उन्होंने कहा कि हमारे राधिका सेवा ट्रस्ट द्धारा विगत कई वर्षों से सर्द मध्य रात्रि में कड़कड़ाते ठंड से बचने के लिए दीन दुखियों, असहायों व जरुरतमंद लोगों को एक सप्ताह कंबल व च्यवनप्राश वितरण किया जाता है। यही सेवा ही भगवान श्री सीताराम व हनुमानजी की सेवा है।
महंत सूर्यभान दास ने सेवा-संवेदना के अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए महंत मामा दास जी के प्रति आभार ज्ञापित किया, उन्होंने कहा कि भगवान श्री हनुमानजी महाराज के आशीर्वाद से व मामा दास के गुरु श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज वस्तुतः हम सभी के प्रेरक हैं और वह स्वयं सेवा के अनेक प्रकल्प संचालित कर हम जैसे अकिंचित सेवाधर्मियों का मार्गदर्शन करते हैं। महंत सूर्यभान दास ने कहा कि राम भक्ति के साथ हमें श्रीराम के जीवन मूल्यों का अनुकरण कर समाज में सभी को स्वस्थ-प्रसन्न रखने का प्रयास करना चाहिए। राधिका सेवा ट्रस्ट ने संतों के मार्गदर्शन को अपने अभियान के लिए बेहद शुभ बताया और कहा कि इसकी स्थापना से ही सेवा-संवेदना का अभियान चलाया जा रहा है।हमारे पूर्वज व भगवान श्री हनुमानजी के आशीर्वाद व यशस्वी संतों के कामकाज से संबल प्राप्त करता रहा है हमारा ट्रस्ट और आज रामलला के पाटोत्सव की पुण्य बेला में सेवा का अवसर अविस्मरणीय है।इस अवसर पर महंत मामा दास, महंत सूर्यभान दास, महंत उपेंद्र दास, महंत लवकुश दास, नागा चौबे दास दर्जनों नागा साधु मौजूद रहें।
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