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: मिथिला परम्परा पद्धति से 251 भार भगवान रामलला को हुआ समर्पित

बमबम यादव

Sat, Feb 3, 2024

रसिकाचार्य स्वामी श्री युगलानन्य शरण जी के शिष्य परम्परा के भक्तों ने श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण के संयोजन में भगवान श्री रामलला को भार अर्पित किया

251 भार "सनेस" के साथ आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण

पांच सौ वर्षों का सपना हुआ पूरा : सूर्य प्रकाश शरण

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामलला जी के प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के संस्थापक रसिकोपासना के महान  रसिकाचार्य स्वामी श्री युगलानन्य शरण जी महाराज की श्री सीतारामनाम जप की परम्परा को अपने जीवन पर्यंत शिरोधार्य करने वाले श्रीलक्ष्मणकिला धीश आचार्य स्वामी श्री सीताराम शरण जी महाराज के कृपा पात्र परम शिष्य पूज्य श्री जानकी शरण मधुकर जी महाराज के तपोस्थली श्री भजनाश्रम भादों कुटी ग्राम जीवसर जिला मुजफ्फरपुर से वर्तमान श्री लक्ष्मणकिला किलाधीस महंत श्री मैथिली रमन शरण जी महाराज की अध्यक्षता में मिथिला की परम्परा पद्धति से 251 भार सनेस उपहार समर्पित किये। साथ ही यह भार श्री रामजन्मभूमि मंदिर में भोग लगाने के साथ साथ आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला, सतगुरु सदन, सियाराम किला, हनुमत निवास, मणिराम दास जी की छावनी, बड़ा जानकीघाट, दिगम्बर अखाड़ा, बड़ी छावनी, हनुमानगढ़ी, कनक भवन सहित विभिन्न मंदिरों में भोग लवाया गया। भादों असमा झिटकहिया जीवसर मुजफ्फरपुर जिला के भक्तों द्वारा
श्री लक्ष्मणकिला के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण के कुशल संयोजन में भगवान रामलला को भार समर्पित हुआ।अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने कहा कि 5 सौ वर्षों के लंबे संघर्ष बाद हमारे आराध्य श्रीरामलला सरकार दिव्य, भव्य, नूतन मंदिर में विराजमान हुए। जहां हम सबने उनका आरती-पूजन, दर्शन किया। जो सपना हम सबने सैंकड़ों वर्ष पहले देखा था। वह सपना साकार हुआ। रामलला टेंट से निकलकर अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। इससे हम सबको गर्व की अनुभूति हुई। यह पल गौरवांवित करने वाला था। इस ऐतिहासिक पल के हम सभी साक्षी बने। सूर्य प्रकाश शरण ने कहा कि हमारी पीढ़ी सबसे अधिक सौभाग्यशाली है। जो हम सबने श्रीरामलला सरकार को भव्य मंदिर में विराजमान होते देखा। उनका दर्शन- पूजन किया। राममंदिर के लिए ना जानें कितने लोग बलिदान हो गए। लोगों ने अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। आज भव्य राममंदिर निर्माण के साथ उनका सपना साकार हुआ।

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