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: 22 जनवरी का दिन 'सनानत स्वतन्त्रता दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए: चिदम्बरानन्द

बमबम यादव

Wed, Mar 6, 2024

कार्तिक मेला में अयोध्या धाम के खालसा धारी अपना-अपना शिविर अवश्य लगायें: महंत संजयदास

कार्तिक मेला में लगने वाले शिविर पूर्व सर्वप्रथम मैं ही स्वयं झाडू लगाने का कार्य करूँगा: गिरीश पति त्रिपाठी महापौर

प्राचार्य महंत डा महेश दास ने किया अनुरोध, कहा-अगले वर्ष से सरयू तट पर कार्तिक माह में कल्पवास हेतु शिविर लगायें

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होते ही भौगोलिक धरातल राममय हो गई।चारों तरफ भगवान के नाम कीर्तन के साथ भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। अयोध्या के विकास में तेजी लाने के लिए और विश्व कल्याण हेतु यज्ञ सम्राट महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज के सानिध्य एवं श्रीमज्जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज के संयोजकत्व में मां सरयू के पावन गोद में ऐतिहासिक विशाल श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्रीराम यज्ञ में दुर्गासप्तशती पाठ, गणपत्यथर्वशीर्ष पाठ एवं पूरुष सूक्त का पाठ नित्य हो रहा है। यह अनुष्ठान 1700 ब्राह्मणों द्वारा किया जा रहा है। 100 कुण्डीय महायज्ञ मे 100 यजमानों द्वारा पूजन एवं हवन कुण्ड में आहुतियाँ भी दी जा रही हैं। महायज्ञ में वृन्दावन कथाव्यास कृष्ण चन्द्र शास्त्री श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करा रहें है। तो वही दोनो संत्र में श्रीराम लीला, श्रीकृष्ण लीला, अखण्ड राम नाम संकीर्तन हो रहा। देर शाम माता सरयू जी की दिव्य आरती हो रहा।

संत सम्मेलन में

श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज जी ने कहा कि भगवान श्रीराम जी अपने निजधाम में विराजमान हो गए हैं, बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि ये समय युग परिर्वतन का क्योंकि आज भारत के प्रत्येक नागरिक ने राम राज्य बनाने के लिए वीणा उठाया है। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी का दिन 'सनानत स्वतन्त्रता दिवस' के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज से दस वर्ष पूर्व कोई कल्पना भी नहीं करता था कि भगवान श्री राम का भव्य मन्दिर भी बन पाएगा किन्तु हम लोग बड़े सौभाग्यशाली हैं कि आज श्रीराम लला सरकार का साक्षात् दर्शन कर पा रह हैं। उन्होंने पूज्य महाराजश्री द्वारा किए जा रहे इस विराट अनुष्ठान के बारे में कहा कि महाराजश्री ने ऐसा कार्य किया है कि जब-जब भगवान श्रीराम जी के मन्दिर की बात चलेगी तो पूज्य महाराजश्री द्वारा किए जा रहे इस महानुष्ठान को भी सदैव स्मरण किया जाएगा। श्रीहनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी महाराज ने कहा में उपस्थित समस्त सन्तों से अगले वर्ष से सरयू तट पर कार्तिक माह में कल्पवास हेतु शिविर लगाने का अनुरोध किया। नगर निगम अयोध्या के महापौर तिवारी मंदिर के महन्त गिरीशपति त्रिपाठी जी ने सरयू तट पर कार्तिक माह में लगने वाले शिविरों में अपना यथासम्भव सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि शिविर लगने से पूर्व सर्वप्रथम मैं ही स्वयं झाडू लगाने का कार्य करूँगा।

श्रीहनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महन्त संजयदास जी महाराज ने कहा कि मुझे महाराजश्री की इस विलक्षण कार्यशैली के बारे में आज ही ज्ञात हुआ कि महाराजश्री केवल भारत ही नहीं बल्कि नेपाल में भी एक कैंसर हॉस्पिटल का निर्माण कराकर नेपाल सरकार को सौंप चुके हैं, वास्तव में यही सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि पूज्य सन्तों द्वारा आगामी कार्तिक माह से कुम्भ मेला की भाँति सरयू तट पर भी शिविर लगाने की इच्छा जागृत हुई है, स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि मैं अयोध्या धाम के खालसा धारियों से अनुरोध करता हूँ कि चाहें छोटा ही सही लेकिन अपने-अपने शिविर लगवाएं अवश्य। स्वामी प्रखर जी महाराज ने कहा कि अयोध्या धाम का इतना महत्व है कि मैं विगत 40 वर्षों से राष्ट्र की सेवा कर रहा हूँ किन्तु यहाँ भगवान सीताराम जी के चरणों में बैठकर यह विचार आया कि राष्ट्र का सर्वांगीण विकास तब तक नहीं हो सकता, जब तक शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा, क्योंकि लोगों के पास डिग्रियाँ तो हैं, किन्तु योग्यता नहीं है। इसलिए इन्हीं सभी बातों पर विचार करते हुए मैने इस यज्ञ में योग्यतानुरूप शिक्षा के विकास के पावन संकल्प को भी सम्मिलित किया है और आप लोगों को विश्वास दिलाता हूँ कि अगले दो वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आप लोग अपनी दृष्टि से देख पाएंगे।अनुष्ठान के संयोजक डॉ० स्वामी राघवाचार्य जी महाराज एवं काशी से पधारे डॉ० सुभाष तिवारी जी ने भी सन्त सम्मेलन को सम्बोधित किया तथा मंच संचालन डॉ० सप्तर्षि मिश्र जी ने किया। संत सम्मेलन में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, महंत सत्यदेव दास, महंत इन्द्रदेव दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मनीराम पहलवान, महंत संजयदास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव, विराट दास आदि ने अपने अपने विचार रखें।यह जानकारी श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयक्त सचिव माता चिदानन्दमयी जी ने दिया। इस अवसर पर राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, मनीष गर्ग, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, राम मोहन बेड़िया, अर्पित गर्ग, राजीव अग्रवाल, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, डॉ० जी०सी० पाठक, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, दिनेश मिश्रा, कनिष्क मेहता, गौरी शंकर भारद्वाज, सीताराम बडोनी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।

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