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: भ्रष्टाचार के चलते सप्तसागर समाप्त, अब प्रशासन को तालाब बचाने की चिन्ता

बमबम यादव

Tue, Dec 24, 2024
भ्रष्टाचार के चलते सप्तसागर समाप्त, अब प्रशासन को तालाब बचाने की चिन्ता
विकास प्राधिकरण ने भवन मानचित्र स्वीकृत कर बनावा दी है कालोनी
कालोनी में निर्मित हो रहे भवन को प्रशासन ने जेसीबी लगवाकर ढहाया
अयोध्या। रामनगरी अयोधय में भ्रष्टाचार के चलते पौराणिक सप्तसागर  समाप्त हो गया और अब प्रशासन व सरकार को तालाब बचाने की चिन्ता जाग्रत हुई है। पौराणिक महत्व वाले सप्तसागर पर बनी कालोनी में निर्मित हो रहे भवन को अवैध बताकर उपजिलाधिकारी सदर व भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुल्डोजर से ढहा दिया गया जबकि भवन बनवाने वाले संतोष कुमार गुप्ता व उनकी पत्नी मनीषा गुप्ता ने सरकारी अमले से बार बार अनुरोध किया कि मैंने सन् 2018 में इस प्लाट को अयोध्या प्रसाद से खरीदा है इसकी रजिस्ट्री होकर खारिज दाखिल हुई है और अयोध्या फैजाबाद विकास प्राधिकरण ने भवन मानचित्र स्वीकृत किया है जिसके लिए तीन लाख रूपये मैने जमा किये हैं सारी प्रक्रिया पूर्ण करने के बाद ही मैने भवन बनवाना शुरू किया है अभी 17 दिसम्बर को मैने छत डलवाई है। जिला प्रशासन ने पहले क्यों नही रोका? बिना पूर्व सूचना दिये अचानक मेरा नवनिर्मित भवन बुल्डोजर लगाकर गिरवाना शुरू कर दिया गया यह योगी सरकार के अधिकारियों का कैसा न्याय है? यदि अधिकारी कहते हैं कि यह तालाब की जमीन है तो जमीन की रजिस्ट्री व दाखिल खारिज होने,भवन मानचित्र स्वीकृत करने में रोक क्यों नही लगाई गयी? भवन निर्माता की यह दलील महत्व रखती है कि आखिर सारे कार्य निर्विघ्न रूप से कैसे हो गये? अब प्रशासन क्यों जागा? उपजिलाधिकारी सदर विकास दुबे का कहना है कि सप्तसागर में जो मकान ध्वस्त किया गया है वह गाटा संख्या  69 में है, जो राजस्व अभिलेखों में तालाब दर्ज है। तालाब में मकान बनवाना अवैध है इसलिए इसे ढहाया गया है? फिलहाल सप्तसागर कालोनी में सैकड़ों भवन पिछले दस साल में बन चुके हैं, जिन्हें विकास प्राधिकरण ने बनने दिया इसमें अधिकांश गेस्ट हॉउस व रेस्टोरेंट हैं। यहां शासन ने सीवर लाइन, विद्युत लाइन, नाली-नाले, सड़कें आदि बनवाया है। सप्त सागर विशाल क्षेत्र में फैला पौराणिक महत्ववाला तालाब था लेकिन अधिकारियों की मिली भगत से कुछ भूमाफियों ने इसकी पटाई कराकर प्लाटिंग करके सारी जमीन बिक्री कर दी,लोगों ने प्लाट खरीदकर आलीशान इमारतें बनवा लीं। सप्तसागर को बचाने व उसके सौन्दर्यीकरण के लिए स्थानीय नागरिकों ने सन् 2000 से देकर सन् 2010 तक शासन- प्रशासन से सप्तसागर विकास समिति के बैनर तले  संघंर्ष किया लेकिन उसमें सफलता नहीं मिली और भ्रष्टाचार के चलते सप्तसागर  समाप्त हो गया। अब प्रशासन व सरकार को तालाब बचाने की चिन्ता जाग्रत हुई है।

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