: भगवान की कथा मंगलकारी है,जाे अमंगल का नाश करती है: विंदुगाद्याचार्य
बमबम यादव
Wed, Nov 23, 2022
तन तुलसी मिथिला पीठाधीश्वर स्वामी श्री विष्णुदेवाचार्य के श्रीमुख से बह रही रामकथा की अमृतवर्षा

अयाेध्या। सीताराम विवाह महाेत्सव के उपलक्ष्य में चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ जी के राजमहल बड़ी जगह में बुधवार काे श्रीरामकथा का शुभारंभ हुआ। महाेत्सव काे पीठ के विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज ने सानिध्यता प्रदान करते हुए कहा कि भगवान सीताराम विवाहाेत्सव के अवसर पर आश्रम में श्रीरामकथा की शुरूवात हाे गई है। भक्तगण कथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ करें। उन्हाेंने कहा कि भगवान की कथा मंगलकारी है। जाे अमंगल का नाश करती है। कथा हमें परमात्मा तक पहुंचाने का सबसे सुगम मार्ग है। इसके द्वारा हमें भगवान का सानिध्य मिलता है। अवधधाम में रामकथा का श्रवण करने और कराने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। वह भी जब सीताराम विवाह महाेत्सव चल रहा हाे। ताे उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तों काे रसास्वादन कराते हुए प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ कथाव्यास तन तुलसी मिथिला पीठाधीश्वर स्वामी श्री विष्णुदेवाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया। हमें भगवान की मर्यादा का पालन करना चाहिए। आज हम सब सीताराम विवाहाेत्सव पर भगवान की अमृतमयी कथा का श्रवण कर रहे हैं। जीव प्रभु राम का अनुसरण करे। उनके बतलाए हुए सच्चाई के मार्ग पर चले। साथ ही उनकी मर्यादा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे। कथा के उद्घाटन सत्र में दिगंबर अखाड़ा महंत सुरेश दास, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश कुमार दास, नागा रामलखन दास आदि संताें ने अपने विचार व्यक्त किए। इससे पहले विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज के कृपापात्र व दशरथ महल व्यवस्थापक मंगल भवन सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास महाराज ने पधारे हुए संत-धर्माचार्यों का अंगवस्त्र ओढ़ा एवं माल्यार्पण कर स्वागत-सत्कार किया। महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज ने व्यासपीठ की आरती उतारी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन धन्य बनाया।
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