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श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहें महंत बलराम दास

संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

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: ध्वंस की बरसी पर रामनगरी में हो रहा सृजन का महाउत्सव

बमबम यादव

Fri, Dec 6, 2024
ध्वंस की बरसी पर रामनगरी में हो रहा सृजन का महाउत्सव

आज रामनगरी में चहुंओर छाएगा राम विवाहोत्सव का उल्लास

रामनगरी सहित देश भर में राम विवाहो पर गूंजेगी शहनाई, आज निकलेगी भगवान राम की भव्य बारात अयोध्या। यूं तो प्रत्येक वर्ष अगहन शुक्ल पक्ष की विवाह पंचमी की तिथि पर राम विवाहोत्सव में आस्था फलक पर होती है लेकिन इस वर्ष रामलला के अपने दिव्य व भव्य धाम में विराजित होने के बाद पहला सीताराम विवाहोत्सव भव्यता व उत्सवधर्मिता के नए प्रतिमान गढ़ेगा। इस वर्ष विवाह पंचमी की तिथि छह दिसंबर यानि आज को है। गत तीन दशक से छह दिसंबर को सुरक्षा की बेड़ियों में जकड़ी रहने वाली रामनगरी में इस बार शहनाई बज रही है। अयोध्यावासी अपने प्रभु के विवाहोत्सव में मग्न होकर आस्था और श्रद्धा निवेदित कर रहें है। धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर फिर से समृद्ध हो रहा है। राम विवाहोत्सव के रंग में रामनगरी सराबोर हो चुकी है। जैसे-जैसे मुख्य पर्व नजदीक आया है, वैसे-वैसे विवाह उत्सव का रंग और भी गाढ़ा हो गया। छह दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा ढहा दिया गया था। इस दिन की यादें पिछले 32 वर्ष से हर किसी के जेहन में ताजा हैं। विध्वंस की बरसी पर पिछले कई दशकों से गम और शौर्य दिवस मनाया जाता रहा है लेकिन यह पहला मौका है जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद विध्वंस की स्मृति को विसरा कर हर कोई अयोध्या में नए सृजन की बात कर रहा है। तीन दशक के लंबे सफर के बाद अब तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। पुण्य सलिला मां सरयू पूरी रौ में प्रवाहमान हैं तो अयोध्या विकास की नई राह पर निकल पड़ी है। नगरी के कनक भवन, दशरथ राज महल बड़ा स्थान, रंग महल, जानकी महल ट्रस्ट, हनुमान बाग, हनुमत निवास, बड़ा भक्त माल सहित दर्जनों मंदिरों में उत्सव का उल्लास छाया है। दशरथ महल के राममहल में शहनाई बजेगी। जानकी महल ट्रस्ट में बनारस से शहनाई वादकों को बुलाया गया है। तो चाट बनारस का,दूध कानपुर तो कलकत्ता की चाय टोस्ट का आनंद उठा रहें बाराती घराती।राम विवाहोत्सव की रौनक देखकर लगता है कि स्याह स्मृतियां भुला अयोध्या सृजन की राह चुन चुकी है। हनुमानगढ़ी से जुड़े संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास जी कहते हैं कि इससे पहले भी एक बार छह दिसंबर को विवाह पंचमी की तिथि पड़ी थी। यह संयोग है कि रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा के बाद भी विवाह पंचमी की तिथि छह दिसंबर को पड़ी है। राम मंदिर निर्माण के बाद एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। आनंदमय होकर अयोध्यावासी रामविवाहोत्सव को मना रहें।

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