: कलेवा के भोग से हुआ राम विवाहोत्सव का समापन
बमबम यादव
Tue, Dec 10, 2024
कलेवा के भोग से हुआ राम विवाहोत्सव का समापन
उत्सव से हम अपनी भावना साझा करते हैं, पर सत्य यह है कि वैष्णवजन सतत श्रीराम की लीला में रमण करते हैं: कृपालु जी
अयोध्या। सप्ताह भर चलने वाले सीता राम विवाहोत्सव का समापन राम कलेवा के साथ हुआ और इसी के साथ राम विवाहोत्सव की रम्यता प्रवाहित हुई। दशरथ राज महल बड़ा स्थान का मुख्य आगार भक्तों से पटा होता है। बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु जी पूरे आह्लाद से उत्सव का संयोजन कर रहे होते हैं। हालांकि यह कहने को कलेवा है, कलेवा के नाम पर पूरे भाव से श्रीराम एवं सीता के युगल विग्रह के सम्मुख छप्पन भोग प्रस्तुत किया गया। सामने मंजे कलाकार जेवनार गायन के साथ श्रीराम से कलेवा ग्रहण करने की मनुहार कर रहे होते हैं। समय जैसे ठहर कर त्रेतायुगीन अतीत की ओर मुड़ गया हो। आचार्य पीठ दशरथमहल बड़ास्थान में श्रद्धालुओं को श्रीराम के दौर में डुबकी लगवा रहा होता है। मंदिर में स्थापित आराध्य विग्रह के साथ पीठाधिपति बिंदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य श्रीराम और सीता के स्वरूप को भी कलेवा करा रहे होते हैं। इसके बाद संतों श्रद्धालुओं का भोज-भंडारा भी उत्सवधर्मिता बयां करता है। महंत रामभूषणदास कृपालु कहते हैं, उत्सव से हम अपनी भावना साझा करते हैं, पर सत्य यह है कि वैष्णवजन सतत श्रीराम की लीला में रमण करते हैं। सरयू तट स्थित एक अन्य आचार्य पीठ लक्ष्मणकिला में भी श्रीराम के प्रति सान्निध्य साहचर्य प्रवाहित हो रहा होता है। किलाधीश महंत मैथिलीरमणशरण व अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण के साथ शाश्वत-सनातन के पाणिग्रहण समारोह का प्रत्येक अंग-उपांग साध रहे होते हैं। साधना समर्पण का यह अनुशासन गायन और नृत्य की प्रस्तुतियों से भी परिभाषित होता है। कोहबर के खेल में श्रीराम की हार और सीता की जीत का जादू श्रद्धालुओं पर ऐसा चढ़ा कि उनके पांव थिरक उठते हैं और स्वयं किलाधीश भी इस उत्सव का पूरी लीनता से स्वागत करते हैं। आचार्य पीठ में कलेवा के साथ साथ संगीत का प्रवाह पूरी रौ में होता है।
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