Thursday 3rd of September 2026

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: नाम संकीर्तन द्वारा समाज को बदलने का कार्य हो रहा: आचार्य स्वामी किंकर श्री

बमबम यादव

Mon, Nov 22, 2021

युवाओं के लिए जय गुरु संप्रदाय ने चलाई मुहिम

अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम अखंड ब्रम्हांड के नायक है। अयोध्या में जन्म लेकर के उन्होंने समाज में मर्यादा स्थापित की काफी लंबे संघर्षों के बाद अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण हो रहा है, तो मंदिर के साथ-साथ अयोध्या की समूची सांस्कृतिक सीमा धीरे धीरे उनकी कृपा से अपने आप विकसित होने लगेगी। क्योंकि देश ही नहीं बल्कि विदेश के भी धार्मिक सांस्कृतिक संस्थाएं अयोध्या में अपना प्रकल्प प्रारंभ करेंगी यह भावना अंतरराष्ट्रीय संगठन अखिल भारतीय जयगुरु संप्रदाय एवं ओंकारनाथ मिशन के आचार्य स्वामी किंकर श्री विट्ठल रामानुज जी महाराज रामोत्सव कार्यक्रम में श्रीधाम अयोध्या प्रवास के दौरान भेंट वार्ता में कही। श्री महाराज जी ने बताया कि अनंत श्री सीतारामदास ओंकारनाथ देव जी भगवान अवतार पुरुष थे। सभी को समाधि में जाने के लिए एक स्थान पर ध्यानिष्ठ हो कर बैठना पड़ता है लेकिन गुरुदेव भगवान भजन करते करते समाधि में पहुंच जाते थे। उनके अनहद में जय गुरु, जय गुरु की ध्वनि सुनाई देती थी तब गुरुदेव भगवान ने जय गुरु संप्रदाय की स्थापना की।
आचार्य स्वामी किंकर जी महाराज ने बताया कि पहले जय गुरु संप्रदाय पश्चिम बंगाल से प्रारंभ हुआ धीरे धीरे पूरे भारत में और आज पूरे विश्व में करोड़ों फॉलोर्स है। उन्होंने बताया कि जय गुरु संप्रदाय नाम संकीर्तन द्वारा समाज को बदलने का कार्य कर रहा है जो युवा भटके हुए हैं उनको भी प्रभु नाम संकीर्तन से ही सनातन धर्म की तरफ लौटाया जा सकता है इसलिए गुरुदेव भगवान का आदेश था कि पूरे विश्व में हरे रामा हरे कृष्णा नाम संकीर्तन किया जाए। संप्रदाय से सभी लोगों को जोड़ा जाए जिससे सनातन धर्म की जड़ मजबूत हो सके और भविष्य में जो युवा पथ से भटक जाएंगे उनको नाम संकीर्तन करा करके उनके मस्तिष्क को शुद्ध करके फिर से सनातन धर्म की तरफ मोड़ा जा सकता है।
आचार्य श्री ने बताया कि जय गुरु संप्रदाय ओंकारनाथ मिशन प्रभु श्री राम की जन्मभूमि अयोध्या में अखंड नाम संकीर्तन करा रहा है और भविष्य में अयोध्या के विकास में जो भी सहयोग होगा वह करेगा क्योंकि प्रभु श्री राम मर्यादा को स्थापित करने के लिए माता पिता की आज्ञा से 14 वर्ष तक वन में भटके उसके उपरांत राम राज्य के लिए अपनी पत्नी सीता को भी त्याग दिया ऐसे मर्यादा को स्थापित करने वाले प्रभु श्री राम की व्याख्या बहुत सरलता से नहीं की जा सकती है। उनको समझने के लिए उनके नाम का संकीर्तन बहुत ही आवश्यक है इसलिए जय गुरु संप्रदाय पूरे विश्व में नाम संकीर्तन गुरुजी के आदेश पर कर रहा है।

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