Wednesday 2nd of September 2026

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हनुमानगढ़ी के सागरिया पट्टी से जुड़े महंत रामकृपाल दास ठाकुर पहलवान को संतों ने किया नमन

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: राम-कृष्ण में है शाश्वत संबंध: महंत संजयदास

बमबम यादव

Wed, Aug 28, 2024

भगवान को लगा छप्पन भोग,हुआ विशेष आरती पूजा

हनुमान बाग में मध्य रात्रि में भगवान का हुआ प्राकट्य उत्सव, बजी बधाईयां

रामनगरी के कनक भवन,रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी, हनुमान बाग, समेत सौकड़ों मंदिरों में मनाया गया जन्माष्टमी

अयोध्या। जग में सुंदर हैं दो नाम- चाहे कृष्ण कहो या राम। जी हां, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भले ही मथुरा में हुआ हो लेकिन अयोध्या से भी काफी गहरा नाता था। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण कनक भवन में महाराज विक्रमादित्य द्वारा संरक्षित शिलापट्टों से देखा जा सकता है। धार्मिक शास्त्रों में दर्ज है कि माता सीता को कनक भवन मुंह दिखाई में मिला था।करीब 2 हजार वर्ष पूर्व महाराजा विक्रमादित्य ने भी कनक भवन का जीर्णोद्धार कराया था। उस दौरान शिलापट्टों को संरक्षित करवाया था। संरक्षित शिलापट्टों को देखें तो साफ पता चलता है कि भगवान श्री कृष्ण जरासंध का वध करने के बाद अयोध्या आए थे। इस दौरान उन्होंने कनक भवन को देखा, जो एक टीले की शक्ल में सिमट कर रह गया था। शिलापट्टों पर लिखे श्लोकों से स्पष्ट हो जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस शिला पर आनंद का अनुभव किया। इसके बाद उन्होंने कनक भवन के जीर्णोद्धार कराने का फैसला किया था। ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने ही कनक भवन का जीर्णोद्धार कराया और वहां पर राम और माता सीता की मूर्ति की स्थापना भी की। वहीं, पौराणिक मान्यता के अनुसार, कनक भवन राजा दशरथ ने रानी कैकेई को प्रदान किया था, जिसे बाद में रानी कैकेई ने यह भवन माता सीता को मुंह दिखाई में दिया था।

रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमानगढ़ी मंदिर में जन्माष्टमी पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के उत्तराधिकारी व संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के संयोजन में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया।यह महोत्सव श्रीमहंत ज्ञान दास महाराज के पावन सानिध्य में मनाया गया। महंत संजयदास ने बताया कि राम और कृष्ण का एक दूसरे के साथ सास्वत संबंध है। दोनों भगवान विष्णु के अवतार के पुरुष हैं। उन्होंने कहा कि पूरे जग में दो ही नाम चलते हैं। एक तो भगवान राम और दूसरे भगवान कृष्ण। इन दोनों ने राक्षसों के नाश के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ी मंदिर में सारे उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। श्रीरामनवमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी व श्री हनुमान जयंती बहुत ही उत्साह से मनाते है। पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। आये हुए अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज ने किया। इस मौके पर महंत रामप्रसाद दास, अजीत दास, अंकित दास, शिवम श्रीवास्तव, कृष्ण कांत दास, कल्लू दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।

तो वही प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग मंदिर में महंत जगदीश दास महाराज के पावन सानिध्य में भगवान का जन्म महोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। भगवान कृष्ण का जन्म जैसे ही घड़ी की सूइयां रात्रि के 12 बजे पर गई वैसे ही डोल नगाड़ों से पूरा मंदिर परिसर गूजा उठा हर तरफ नंद के घर आनंद भयों जय कन्हैया लाला की नारे लगने लगे। पूरा परिसर भक्ति मय हो गया। संत साधक एकदूसरे को जन्माष्टमी की बहुत देने लगे। इस मौके पर पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री आदि लोग मौजूद रहें।

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