: गीता जयंती पर वाल्मीकि भवन में गूंजे भागवत के श्लोक
Wed, Dec 15, 2021
अयोध्या। मणिरामदास की छावनी स्थित वाल्मीकि भवन में गीता के श्लोक समवेत स्वर में गूंजे तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। अवसर था गीता जयंती का। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास जी महाराज के अध्यक्षता व उनके उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास जी महाराज के संयोजन में आयोजित गीता जयंती महोत्सव में एक हजार से अधिक वैदिक विद्वानों ने गीता पाठ किया। साथ ही महंत नृत्यगोपाल दास जी के दीर्घायु होने की भी कामना की गई।मणिरामदास की छावनी में भव्यता पूर्वक गीता जयंती का महोत्सव मनाया गया। छह दिसंबर 1992 को जब विवादित ढांचा ध्वंस हुआ था, तब भी गीता जयंती थी, जिसके बाद से गीता जयंती को भव्यता पूर्वक मनाने का क्रम शुरू हुआ। मणिराम दास छावनी के आचार्य आनंद शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष गीता पाठ के जरिए पूज्य गुरुदेव महंत नृत्यगोपाल दास के दीर्घायु होने की भी कामना की गई है।इस आयोजन में करीब दो हजार वैदिक विद्वान शामिल रहे। कार्यक्रम में मौजूद विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता शरद शर्मा ने बताया कि 6 दिसंबर 1992 को जब विवादित ढांचा को कारसेवकों ने गिराया था उस दिन भी गीता जयंती ही थी। आज 14 दिसंबर मंगलवार को बड़े ही धूमधाम के साथ गीता जयंती मनाई गई। गीता जयंती को उत्सव के रूप में मनाते आ रहे हैं। इस बार हजारों की संख्या में विद्वानों ने गीता का पाठ कर सभी भव्य दिव्य राम मंदिर का निर्माण हो, इसके साथ ही महाराज श्री महंत नृत्य गोपाल दास के दीर्घायु होने की कामना की है। इस दौरान महंत अर्जुन दास, आचार्य राधेश्याम शास्त्री, पंजाबी बाबा, अनिरूद्घ शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।
गीता जयंती पर पाठ करते विद्यार्थी
गीता जयंती पर पाठ करते आचार्य गण
: दुबई में जीवंत होंगे रामजन्म और राज्याभिषेक के प्रसंग
Wed, Dec 15, 2021
दुबई एक्सपो 2021 में होगी रामनगरी अयोध्या की रामलीला
वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका, नैरोबी, बैंकाक व सूरीनाम में रामलीला कर चुकी है अयोध्या की रामलीला
अयोध्या। खाड़ी देशों के बीच पहले वैश्विक मेले एक्सपो 2021 दुबई में रामनगरी अयोध्या की रामलीला होगी। अयोध्या से रामलीला का दल जाएगा। आगामी 19 से 23 दिसंबर तक दुबई में रामलीला का मंचन होगा। इसकी जिम्मेदारी रामनगरी अयोध्या की ऐतिहासिक अवध आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर के संयोजक महंत मनीषदास के नेतृत्व में होगी रामलीला। खाड़ी देश में जीवंत होंगे रामजन्म और राज्याभिषेक के प्रसंग। यह रामलीला उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग की ओर से अयोध्या की रामलीला को आमंत्रित किया है। भगवान श्रीराम के आदर्श चरित्र और उनकी लीला यात्रा को जानने-समझने की चाह रखने वाले देशों की संख्या भी अब बढ़ रही है। धर्म और जाति से ऊपर भगवान राम के चरित्र को जानने-समझने के लिए सभी अयोध्या की रामलीला को देखना चाहते हैं। समय-समय पर दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों की यह इच्छा रामनगरी की रामलीला मंडलियों ने पूरी भी की।अब खाड़ी देश के लोग पहली बार अयोध्या की रामलीला का मंचन देखेंगे।
दुबई एक्सपो 2021 में रामनगरी अयोध्या का रामलीला दल जाएगा। आगामी 19 से 23 दिसंबर तक दुबई में रामलीला का मंचन होगा। इसकी जिम्मेदारी रामनगरी के ही अवध आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर के संयोजक महंत मनीषदास को दिया गया है। वह दुबई जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग के संयोजन में दुबई जाना है। सभी कलाकारों के पासपोर्ट विभाग में जमा कर दिए गए हैं।
तीन सौ साल पुरानी है अवध आदर्श रामलीला मंडल: महंत शशिकांत दास
महंत शशिकांत दास अध्यक्ष अन्जनेया सेवा संस्थान
महंत मनीष दास निर्देशक रामलीला मंडली
अयोध्या। तीन सौ साल पुरानी है अवध आदर्श रामलीला मंडल, पत्थर मंदिर में रामलीला की परंपरा तीन सौ वर्ष पुरानी है। अवध आदर्श रामलीला मंडल के बैनर तले पहले महंत शशिकांत दास व महंत मनीष दास के गुरु महंत जयरामदास जो अवध आदर्श रामलीला मंडल का डंका विदेशों में फहरा चुके है। आज अपने गुरु के पदचिन्हों पर चलतें हुए महंत शशिकांत दास व महंत मनीष दास रामलीला को देश दुनिया में स्थापित कर रहे है। रामलीला कलाकारों को प्रशिक्षित करने का दायित्व महंत मनीष दास निभा रहे हैं।
दक्षिण अफ्रीका सहित दर्जनों देश में कर चुके है रामलीला: महंत मनीषदास
अयोध्या। अवध आदर्श रामलीला मंडल के निर्देशक पत्थर मंदिर के महंत मनीषदास ने बताया कि दुबई से पहले उनकी मंडली वेस्टइंडीज, दक्षिण अफ्रीका, नैरोबी, बैंकाक व सूरीनाम जा चुकी है और रामलीला के विविध प्रसंगों का मंचन कर चुकी है। वह बताते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में तो वहां के लोगों के निजी आमंत्रण पर गए थे। अधिकांश देशों में यूपी सरकार की ओर से भेजे गए थे। उन्होंने बताया कि 12 सदस्यीय रामलीला कलाकारों का दल दुबई जायेगा। इसमें भगवान राम का चरित्र उत्तम कुमार पांडेय तो मां सीता की भूमिका में पूरणचंद होंगे। सजीवन मिश्रा रावण तो प्रेम नारायण शर्मा जनक और हनुमान प्रसाद हनुमान जी की भूमिका निभाएंगे। दीपक कुमार चौबे गायन से प्रसंग को उकेरेंगे और तबले पर दीपांशु चौबे होंगे।
: भाजपा विधायक रहे खब्बू तिवारी की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाई कोर्ट ने की खारिज, जानिए पूरा मामला
Tue, Dec 14, 2021
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने गोसाईगंज विधानसभा से भाजपा विधायक रहे इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी की जमानत अर्जी खारिज कर दी, पूर्व विधायक को अयोध्या की सत्र अदालत ने 29 साल पुराने एक आपराधिक मामले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी
लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या जिले के गोसाईगंज विधानसभा से भाजपा विधायक रहे इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। पूर्व विधायक को गत 18 अक्टूबर को अयोध्या की सत्र अदालत ने 29 साल पुराने एक आपराधिक मामले में पांच साल की सजा सुनाई गई थी। जिसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी। अपील के साथ दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संगीता चंद्रा की एकल पीठ ने खब्बू तिवारी को जमानत देने से इन्कार कर दिया।
सजायाफ्ता होने के कारण इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी की विधानसभा सदस्यता रद की जा चुकी है। बता दें कि साकेत महाविद्यालय के प्राचार्य ने वर्ष 1992 में इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी के खिलाफ फर्जी मार्कशीट के आधार पर प्रवेश लेने के संबध में एक प्राथमिकी राम जन्मभूमि थाने पर दर्ज करवाई थी। इस केस में अयोध्या की अपर सत्र न्यायाधीश ने 18 अक्टूबर 2021 को खब्बू को दोषी पाते हुए पांच साल की सजा सुनाई है।
फर्जी अंकपत्र का है मामला : गत 18 अक्टूबर को खब्बू तिवारी को सजा सुनाए जाने के बाद ही यह आशंका थी कि खब्बू तिवारी की विधानसभा से सदस्यता रद हो जाएगी। यह मामला फर्जी अंकपत्र के आधार पर महाविद्यालय में प्रवेश लेने का है। साकेत महाविद्यालय के तत्कालीन प्राचार्य यदुवंश राम त्रिपाठी ने 18 फरवरी, 1992 को रामजन्मभूमि थाने में एफआइआर दर्ज कराई थी। प्राथमिकी के मुताबिक खब्बू तिवारी ने 1990 में बीएससी द्वितीय वर्ष की परीक्षा अनुत्तीर्ण होने पर फर्जी अंकपत्र के आधार पर अगली कक्षा में प्रवेश ले लिया।
13 साल बाद भेजी गई थी चार्जशीट : वर्ष 1992 में दर्ज मामले की चार्जशीट 13 साल बाद अदालत भेजी गई। अदालत में मुकदमे की पत्रावली से कई मूल दस्तावेज भी गायब हो गए। अदालत में सभी दस्तावेजों की प्रतियां तैयार कराकर सुनवाई आगे बढ़ाई गई। वादी यदुवंशराम त्रिपाठी की मृत्यु भी केस परीक्षण के दौरान हो गई। साकेत महाविद्यालय के तत्कालीन अधिष्ठाता महेंद्र कुमार अग्रवाल, गोपनीय कार्यालय के रामबहादुर सिंह व अन्य गवाहों ने अदालत में गवाही दी। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण प्रकाश त्रिपाठी ने अभियुक्तों को कड़ी से कड़ी सजा देने की दलीलें दी थीं।