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: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: रामदिनेशाचार्य 

बमबम यादव

Tue, Jul 2, 2024

हरिधाम गोपाल पीठ में भव्य श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ

अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी के श्रीमुख से हरिधाम गोपाल पीठ में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं। स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है।  कथा व्यास का पूजन यजमान ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे।

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