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: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: जगद्गुरू

बमबम यादव

Thu, Feb 23, 2023

अयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा  एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्‍गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें जगद्गुरू रत्नेश प्रपन्नाचार्य ने जानकी महल ट्रस्ट में आयोजित वाल्मीकि रामायण कथा के तृतीय दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। स्वामीजी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये  क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। कथा से पूर्व आयोजक कुसुम सिंह व डॉ० दिनेश कुमार सिंह ने व्यास पीठ का पूजन किया।

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