: पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्य
बमबम यादव
Wed, Mar 26, 2025
पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम: रामानन्दाचार्य
मर्यादा का उल्लंघन न करना ही रामत्व का प्रतीकः उषा दीदी
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी विशाल संत-समागम का हुआ भव्य आयोजन
सनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर हुई गोष्ठी
अयोध्या। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद अलग-अलग मत-मतांतरों के विभिन्न समूहों की ओर से अलग अलग धार्मिक आयोजन के अतिरिक्त बौद्धिक कार्यक्रमों का सिलसिला भी चलता रहा है। इसी श्रृंखला में मंगलवार को ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की ओर से भी संत-समागम का आयोजन तुलसी उद्यान में किया गया। इस मौके पर जगगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के अलावा अन्य संतों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस मौके पर सनातन धर्म के संवाहक प्रभु श्रीराम विषय पर गोष्ठी भी हुई। इस कार्यक्रम का अनावरण माउंट आबू स्थित ईश्वरीय विश्वविद्यालय की प्रमुख उषा दीदी ने संतों के साथ किया। उन्होंने संतों के प्रति अपनी श्रद्धा निवेदित करते हुए उनका यथोचित सम्मान किया। उन्होंने गोष्ठी के विषय पर केन्द्रित अपने उद्बोधन में कहा कि राम का ईश्वर होना उतना महत्वपूर्ण नहीं था जितना कि किसी भी परिस्थिति में मर्यादा पर अडिग रहना था। वहीं जगगुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य ने कहा कि पूरी दुनिया में चरित्र की श्रेष्ठता का एक मात्र उदाहरण श्रीराम ही है जिन्होंने हर परिस्थिति में समभाव बनाए रखा। युवराज बनने का न हर्ष था और न ही वनवास जाने का संताप ही रहा। उन्होंने जातिवादी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रामराज्य की परिकल्पना ही यही है कि समाज में ऊंच-नीच व छोटे-बड़े का भेदभाव तिरोहित हो जाए। उन्होंने कहा कि श्रीराम वस्तुतः सनातन परंपरा के महानतम दूत हैं, उन्होंने अपने जीवन में जिस शील, करुणा, विनय, धैर्य-शौर्य का परिचय दिया है, वह सनातनता से अनुप्राणित है। जगद्गुरु ने कहा कि यदि सनातन मूल्यों और आदशों की जड़ों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, तो हमें श्रीराम के जीवन में झांक कर ऐसे मूल्यों और आदर्शों को अनुभूत कर लेना चाहिए।बावनजी मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभशरण ने 'सनातन परंपरा के संवाहक श्रीराम'. का विषय तय करने के लिए आयोजकों के प्रति आभार ज्ञापित किया। कहा, सनातन को समझने के लिए श्रीराम से उत्तम उदाहरण दूसरा नहीं है और श्रीराम को समझने के लिए हमें गोस्वामी तुलसीदास से लेकर अयोध्या के उन आचार्यों का अनुगमन करना होगा, जिन्होंने अन्य किसी लोभ में पड़े विना श्रीराम और उनके सत्य के लिए जीवन समर्पित किया। कामधेनु आश्रम के महंत महामंडलेश्वर आशुतोषदास ने कहा, सनातन परंपरा आचार्य निष्ठा की पर्याय है और आचार्य निष्ठा के सर्वाधिक प्रभावी प्रेरक श्रीराम हैं। संत करपात्री ने कहा कि श्रीराम में सहज अनुशासन निहित है और यदि जीवन के शाश्वत सार रूपी सनातन को जीवंत करना है, तो श्रीराम जैसा आत्मानुशासन अंगीकार करना होगा। ईश्वरीय विश्वविद्यालय के मुख्यालय से आईं राजयोगिनी ऊषा बहन ने कहा कि जिन मूल्यों और अनुशासन पर चल कर श्रीराम और सीता ने अपने जीवन का निर्वाह किया, वह सनातन परंपरा का श्रेष्ठतम उदाहरण है। कार्यक्रम की रूपरेखा बीके मुकेश भाई व संचालन दिल्ली की बीके लता ने किया। इस दौरान हैदराबाद के सुप्रसिद्ध टॉलीवुड डायरेक्टर शिवा मुप्पलनैनी ने सभी संतों का सुनहरी दुशाला पहनाकर सम्मानित किया।
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