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संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

अयोध्या में पार्किंग व्यवस्था पर सवाल, श्रद्धालुओं से अवैध वसूली के आरोप

सृष्टि एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही: प्रबंध निदेशक रवि यादव 

सौरभ कुमार ने 98.10 व सुमित तिवारी ने 96.64 अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया 

संतों के सान्निध्य में वैष्णव परंपरा के अनुसार विधिवत अनुष्ठान कर अमित कुमार दास को कंठी, चादर और तिलक देकर महंत पद की

सुचना

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: रामकथा के माध्यम से भगवान राम के चरित्र का हो रहा गुणगान

बमबम यादव

Sat, Jul 19, 2025
रामकथा के माध्यम से भगवान राम के चरित्र का हो रहा गुणगान कहा, श्रीरामजन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों बाद हमारे श्रीरामलला व रामदरबार विराजित हो गए,भक्तों के हृदय का वह आनंद, ब्रह्मानंद में परिवर्तित हो गया अयोध्या सप्तपुरियों में मस्तक कहा गया है: रामदास बाबा अयोध्या। अयोध्या शब्द सुनते ही स्वत: अर्थ बोध होने लगता है। जहां कोई युद्ध न हो।जहां के लोग युद्ध प्रिय न हो जहां के लोग प्रेम प्रिय हो।जहां प्रेम का साम्राज्य हो।जो श्रीराम प्रेम से पगी हो वो अयोध्या है।इसका एक नाम अपराजिता भी है।जिसे कोई पराजित न कर सके जिसे कोई जीत न सके अथवा जहां आकर जीतने की इच्छा ख़त्म हो जाये जहां सिर्फ़ अर्पण हो समर्पण हो वो अयोध्या है।अथवा इसका एक नाम अवध भी है और श्रीराम अवधेश कहलाये। उक्त बातें व्यासपीठ से ख्यातिलब्ध कथाव्यास महामंडलेश्वर उत्तम दास महाराज ने कही। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्याधाम के मणिरामदास छावनी के श्रीराम सत्संग भवन में नौ दिवसीय श्रीरामकथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस महामंडलेश्वर उत्तम दास महाराज ने भक्तगणों को मंगलमयी श्रीरामकथा का रसपान कराया। इससे श्रोतागण मंत्रमुग्ध और भावविभोर हो गए। वहीं श्रीरामकथा के संयोजक श्री 108 रामदास त्यागी उर्फ राम बाबा महाराज ने कहा कि यह पावन पुनीत श्रीअवध धाम है। जिसे सप्तपुरियों में मस्तक कहा गया है। यह सातों पुरी में मस्तक के समान है। अवध धाम की बड़ी ही महिमा है। जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। प्रभु श्रीराम ने पूरे देश-दुनिया को मानवता का पाठ पढ़ाया और मानवता का संदेश दिया। भगवान श्रीराम जैसा कोई नही है। आज सारा संसार उनका गुणगान करता है। एक आदर्शवादी राजा, पिता, पुत्र, भाई, पति आदि के रूप में भगवान श्रीराम सभी जगह खरा उतरे। उन्होंने सबको मर्यादित जीवन जीना सिखाया। हम सब परम सौभाग्यशाली है। जो हम सबको अयोध्या धाम जैसी इस पवित्र धरा पर सत्संग लाभ व श्रीरामकथा का दिव्य आनंद प्राप्त हो रहा है। जैसा की शास्त्रों में अवध धाम की महिमा गाई गई है। अयोध्या नाम ही अपने आप में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्वरूप है। केवल अयोध्या नाम लेने मात्र से ही तीनों देवताओं के नाम लेने का फल मिल जाता है। साठ हजार वर्षों तक गंगा तट पर रहकर भजन-साधना करने का जो फल है। वह फल केवल अयोध्यापुरी के दर्शन करने मात्र से ही मिल जाता है। अयोध्यापुरी की महिमा को बढ़ाने के लिए भगवान के नेत्रों से नेत्रजा सरयू मैया प्रकट हुई हैं। जिनके बारे में कहा गया है कि कोटि कल्प काशी बसे, मधुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे, तुले न तुलसीदास। ऐसी मां सरयू, अयोध्या धाम और हमारे प्रभु श्रीराम की महिमा है। अब तो आनंद ही नही, महा आनंद का अवसर हम सबको मिला है। जब श्रीरामजन्मभूमि पर पांच सौ वर्षों बाद हमारे श्रीरामलला व रामदरबार विराजित हो गए हैं। भक्तों के हृदय का वह आनंद, ब्रह्मानंद में परिवर्तित हो गया है। नित्य प्रति अनेकानेक भक्त श्रीधाम अवध में पधार रहे और बड़े भाव से श्रीरामलला का दर्शन कर रहे हैं। इससे पहले श्रीरामकथा के मुख्य यजमान गुरु सेवक बद्रीप्रसाद भैयालाल सोनी ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर भव्य आरती उतारी। अंत में तृतीय दिवस की कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजनों ने अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन सार्थक बनाया व पुण्य के भागीदार बने।

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