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अयोध्या में पार्किंग व्यवस्था पर सवाल, श्रद्धालुओं से अवैध वसूली के आरोप

सृष्टि एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही: प्रबंध निदेशक रवि यादव 

सौरभ कुमार ने 98.10 व सुमित तिवारी ने 96.64 अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया 

संतों के सान्निध्य में वैष्णव परंपरा के अनुसार विधिवत अनुष्ठान कर अमित कुमार दास को कंठी, चादर और तिलक देकर महंत पद की

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: शिवादास और सुखदेव बने श्रीहनुमानगढ़ी के पुजारी

बमबम यादव

Sun, Mar 16, 2025
शिवादास और शुकदेवदास बने हनुमानगढ़ी के पुजारी हनुमानगढ़ी से सागरिया पट्टी के दो युवा नागा को पट्टी की पंचायती बैठक में सर्वसम्मत से चुना गया पुजारी धर्मसम्राट श्री महंत ज्ञानदास महाराज की अध्यक्षता में हुई सागरिया पट्टी की बैठक श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या की पूरे विश्व में एक विशिष्ट पहचान है, हनुमानगढ़ी श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा की प्रधान पीठ है: श्रीमहंत ज्ञानदास अयोध्या। रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्रीहनुमानगढ़ी की सागरिया पट्टी की तरफ से दो युवा नागाओं को हनुमानजी के सेवा पूजन का दायित्व सौंपा गया। यह दायित्व पट्टी की पंचायती बैठक में सर्वसम्मत से लिया गया। यह पुजारपना समयावधि के हिसाब से क्रम चलता रहता है। पट्टी सागरिया के समयावधि पर धर्मसम्राट श्री महंत ज्ञानदास जी महाराज के आसान पर पट्टी की पंचायती बैठक हुई, जिसमें सर्वसम्मत से सभी नागा संतों ने चरण पादुका से बाबा लक्ष्मण दास जी महाराज के यहां से शिवा दास व बाबा रामसेवक दास जी महाराज के यहां से सुखदेव दास को हनुमानजी महाराज का सेवा पूजन का दायित्व सौंपा गया बकायदा लिखापढ़ी करके पुजारी नियुक्त किया गया। इसके दोनो नवनियुक्त पुजारी को हनुमानजी महाराज के समक्ष ले जाकर दंडवत कराके महावीरी से अभिषेक किया गया। पट्टी के बैठक में पट्टी के दो युवा संतों शिवा दास और सुखदेव दास को हनुमानगढ़ी का पुजारी नियुक्त किया गया। यह बैठक अखाड़ा परिषद के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे धर्मसम्राट महंत ज्ञानदास की अध्यक्षता में हुई जिसमें पट्टी के सैकड़ों संतों की मौजूदगी रही।पुजारी नियुक्त के समय श्री महंत ज्ञानदास जी महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्म स्थली अयोध्या की पूरे विश्व में एक विशिष्ट पहचान है। हनुमानगढ़ी श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा की प्रधान पीठ है। हनुमानगढ़ी और यहां के संतों का सम्मान त्याग और तपस्या के साथ घर्म की रक्षा के लिए है। उन्होंने कहा कि किसी भी संत की पहचान उसके वेश, तिलक और आचरण से होती है। हमें इसको हमेशा उच्च स्तर पर बनाए रखना है। हमें किसी भी सूरत पर अपने पहचान से समझौता नहीं करना चाहिए। श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज ने कहा कि कभी कभार कुछ संत शाम के स्नान के बाद बिना तिलक आश्रम से निकलते हैं। यह किसी भी दशा में उचित नहीं है। हमें हर हाल में तिलक धारण करके ही आश्रम से निकलना चाहिए। तिलक ही बताता है कि हम हनुमानगढ़ी के संत है। हमें आदर पाने के लिए पीठ के सिद्धांतों का कड़ाई से पालन करना होगा। अखाड़े के सारे नियम संतों के सम्मान और सुरक्षा के लिए ही आचार्यों ने बनाए है। पंचायती बैठक में मौजूद सभी वरिष्ठ नागा संत व युवा नागा संतों का धर्मसम्राट श्री महंत ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास महाराज ने आभार प्रकट किया। सभी का स्वागत परम्परागत तरीकें से श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के उत्तराधिकारी हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास महाराज व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने सयुंक्त रुप से किया। बैठक में तीनों अनियों के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधव दास, बाबा सरोज दास, संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास, गद्दनशीन महंत प्रेमदास के उत्तराधिकारी महंत डाक्टर महेश दास, बाबा रामप्रसाद दास, महंत बलराम दास,इंद्रदेव दास पहलवान, हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, नागा रामदास, महंत सुरेंद्र दास, बाबा लक्ष्मण दास, विवेक दास, सरवन दास, पुजारी अनिल दास,अम्बिका दास, विराट दास, मोहन दास, अंकित दास महंत संजयदास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

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