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: बंगाल से अयोध्या राम नाम रथ श्री रामचन्द्र की श्री पादुका निकली

बमबम यादव

Thu, Jan 11, 2024

15 जनवरी को रथयात्रा पहुंचेगी सुरसरि मंदिर अयोध्या, तय करेगी 11 हजार किमी की यात्रा

श्री श्री ओंकारनाथ देव ने रामनाम भजन के माध्यम से भारत के लोगों को दिखाया मुक्ति का मार्ग: प्रियनाथ

अयोध्या। सनातन धर्म की अन्यतम स्तंभ अनंतश्री सीतारामदास ओंकारनाथ जी ने भारत के विभिन्न भागों में स्थित अपने 125 से अधिक आश्रमों में असंख्य राम मंदिरों की स्थापना की है। दीक्षा के समय उन्होंने शिष्यों से गुरुदक्षिणा के रूप में किसी से धन की मांग नहीं की। उक्त बातें सीतारामदास ओंकारनाथ मिशन जयगुरु सम्प्रदाय के महासचिव प्रियनाथ चट्टोपाध्याय ने बताया। श्री चट्टोपाध्याय ने कहा कि गुरुदेव के प्रत्येक शिष्य को एक बही-खाते में चार लाख राम नाम लिखने और उन्हें सौंपने का निर्देश दिया। उनके आश्रमों में से 12 मंदिर इसी प्रकार लिखे गए एक सौ पच्चीस करोड़ रामनामों के आधार पर बनाया गया है। श्री श्री ओंकारनाथ देव ने रामनाम भजन के माध्यम से भारत के लोगों को मुक्ति का मार्ग दिखाया। भगवान श्री श्री ओंकारनाथ देव को संत ने श्री राम अवतार रूप में अर्चन करते थे। श्री राम जन्मभूमि उद्धार के लिए श्री श्री ठाकुर ने अपनी प्रार्थना पर लिखित रूप से करोड़ो भक्त को आदेश दिया था रोज तीन बार श्री राम जी का पाश श्री राम जन्म भूमि उद्धार के लिए प्रार्थना करने के लिए। " आपका जन्मभूमि उद्धार के लिए, आपके भक्तगण प्रार्थना कर रहा है। प्रभु आप इनका प्रार्थना सुन के इनका अभीष्ट पुरण करो।"
     प्रियनाथ चट्टोपाध्याय ने बताया कि श्री गुरुदेव के समय से लेकर सौ वर्षों से भी अधिक समय तक उनके शिष्यों और भक्तों ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर को बचाने का जो सपना देखा था, वह आज सफल होने जा रहा है। उस आनंद में, उस भाव में, ये नम्रता बहुत आगे बढ़ रही है अयोध्या की ओर। यह भावना कोई राजनीतिक भावना नहीं है,यह भाव भक्ति का भाव है। यह भाव सुन्दर रामनाम जप से मुक्ति का भाव है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री रामचन्द्र सभी भारतीयों के लिये अत्यंत अनुराग और भक्ति के विषय हैं। हम इस नाम के रथ में श्री रामचन्द्र की श्री पादुका लेकर चल रहे हैं। ये यात्रा 15 जनवरी तक अयोध्या पहुचेगा। जिस क्षेत्र से यह नम्रथ गुजर रहा है, उस क्षेत्र के श्रद्धालुओं को इस श्रीपादुका के दर्शन-पूजन का सौभाग्य मिल रहा है। आज इस क्षेत्र के नम्रथ का आगमन हुआ है और इस नम्रता को मनाने के लिए श्री गुरुदेव के शिष्य और सभी राम भक्त एकत्रित हुए हैं। इसलिए आज का दिन भावनात्मक आनंद का दिन है। यह यात्रा रामनगरी में सीतारामदास ओंकारनाथ मिशन जयगुरु सम्प्रदाय के प्रमुख मंदिर सुरसरि मंदिर आयेगी जहां पर विधि विधान से पूजन होगा।

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