Tuesday 5th of May 2026

ब्रेकिंग

संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

अयोध्या में पार्किंग व्यवस्था पर सवाल, श्रद्धालुओं से अवैध वसूली के आरोप

सृष्टि एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही: प्रबंध निदेशक रवि यादव 

सौरभ कुमार ने 98.10 व सुमित तिवारी ने 96.64 अंक प्राप्त कर जिले का मान बढ़ाया 

संतों के सान्निध्य में वैष्णव परंपरा के अनुसार विधिवत अनुष्ठान कर अमित कुमार दास को कंठी, चादर और तिलक देकर महंत पद की

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे, उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति,जो हमारे आत्मा में बसा है: चंपत राय

बमबम यादव

Thu, Jun 12, 2025
सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे, उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति,जो हमारे आत्मा में बसा है: चंपत राय ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर सदुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती कबीर मठ में धूमधाम से मनाई गई सदगुरु कबीर मानव एकता के पैरोकार थे: उमाशंकर दास अयोध्या। ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा पर सदुरु कबीर साहब की 627वीं जयंती कबीर मठ जियनपुर मोहबरा बाजार, अयोध्याधाम में धूमधाम से मनाई गई। समारोह की अध्यक्षता करते हुए संत परीक्षा साहेब ने कहा कि कबीर ज्ञान, नाम, आचार्य के अद्भुत अनोखे महापुरुष थे। जाति, पाति, धर्म, पंथ को मानने वाला व्यक्ति कबीर साहब को कभी समझ नही पायेगा। हिंदू, जैन, बौद्ध, ईसाई, मुस्लिम धर्म नहीं पंथ है। जो किसी व्यक्ति के द्वारा बनाया गया है। जो चेतना के द्वारा सत्य और असत्य का का परख करता हो वह धर्म है। सदगुरु कबीर ने समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया। वर्तमान समय में भी कबीर दास ने जो कहा वह आज सत्य हो रहा है। मुख्य अतिथि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि सगुरु कबीर दास समाज सुधारक थे। उनकी भक्ति निर्गुण निराकार की भक्ति है। जो हमारे आत्मा में बसा है। इसी भक्ति का नाम आध्यात्म है। कबीर दास का जन्म हिन्दू या मुस्लिम में हुआ यह चर्चा का विषय नही है। बल्कि उनके विचारों को आत्मसात करने की जरूरत है और उसका प्रचार-प्रसार हो। कबीर दास का जन्म भक्ति काल में हुआ। उसी समय जगतगुरु रामानंदाचार्य महाराज ने कहा था जाति पाति पूछय न कोई, हरि को भजैय सो हरि का होई। विश्व कबीर विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष संत उमाशंकर दास ने कहा कि सदगुरु कबीर मानव एकता के पैरोकार थे। उन्होंने भ्रम जाल से मुक्ति पाने का संदेश दिया। उत्तर प्रदेश में कबीर पंथियों की 60 प्रतिशत आबादी है। जो लगभग 22 करोड़ होती है। कबीर पंथ के साधु संत अपनी भागीदारी को लेकर एकजुट होने की बात कर रहे हैं। समारोह का संचालन सरल दास ने किया। कार्यक्रम का संयोजन धर्म प्रकाश दास, अचिन्त दास, दुःखशमन दास द्वारा किया गया। इससे पहले जयंती समारोह का शुभारंभ बीजक पाठ से हुआ। कार्यक्रम में संत निहाल साहेब, बनवारी पति,ब्रह्मचारी, संत निर्मल साहेब बिहार, संत विकास साहेब कौशांबी, संत राम साहेब कौशांबी, संत विचार साहेब, संत प्रकाश साहब, संत विनय शरण साहेब, संत विवेक ब्रह्मचारी, महंत रामेश्वर दास, डॉ. अनिल सिंह, संत शील दास आदि ने अपने विचार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व जिपं अध्यक्ष राजित राम पटेल, उमाशंकर सिंह, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष साकेत रामचंद्र वर्मा, ज्ञानचंद वर्मा, डॉ. अवधेश वर्मा, विहिप प्रवक्ता शरद शर्मा आदि उपस्थित रहे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें