: झूलन महोत्सव से सराबोर रहा रामलला सदन देवस्थानम
बमबम यादव
Mon, Aug 11, 2025
झूलन महोत्सव से सराबोर रहा रामलला सदन देवस्थानम
देवस्थानम में सोने व चांदी के बने भव्य विशालकाय झूलन पर भगवान लक्ष्मीनारायण का झूलन महोत्सव रहा आकर्षण का केंद्र
अयोध्या। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के पावन अवसर पर पवित्र अयोध्याधाम के मठ-मंदिरों में श्रद्धा, भक्ति और आस्था की बैतरणी बही। उस बैतरणी में साधु-संत से लेकर सभी भक्तगण सराबोर रहे। अवसर था अयोध्यानगरी के सुप्रसिद्ध श्रावण झूलनोत्सव का। जो श्रावण शुक्ल तृतीया से प्रारंभहोकर श्रावण शुक्ल पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन तक चला। लाखों श्रद्धालुगण युगल सरकार के झूलन महोत्सव का दर्शन कर पुण्य के भागीदार बने। तो कुछ मंदिरों में पंचमी या एकादशी से झूलन महोत्सव शुरु हुआ था। इसी क्रम में रामलला सदन देवस्थानम में सोने व चांदी के बने भव्य विशालकाय झूलन पर भगवान लक्ष्मीनारायण जी विराजमान होकर झूला झूल रहें थे तो संत साधक गीत संगीत के अनेकों पद अपने आराध्य के श्री चरणों में निवेदित कर रहें थे। रामलला सदन में भव्य फूल बंगले की झांकी सजाई गई जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संतों का समागम हुआ। अतिथियों का स्वागत खुद देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज कर रहें थे। मंदिर में झूलन महोत्सव अपने चरमोत्कर्ष पर रहा। जहां सावन शुक्ल नवमी से प्रारंभ होकर श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तक झूलनोत्सव का कार्यक्रम चला। झूलन उत्सव को मंदिर के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज ने अपनी सानिध्यता प्रदान किया। मंदिर में प्रतिदिन सायंकाल युगल सरकार के झूलनोत्सव की भव्य झांकी सज रही थी। झूलनोत्सव का कार्यक्रम देररात्रि तक चलता रहा। झूलन सरकार के झूलन झांकी का दर्शन कर भक्तजनों ने अपना जीवन धन्य बनाया। नामचीन कलाकारों ने अपने गायन-वादन से उत्सव की शमां बांध दी। कलाकारों ने झूलनोत्सव में चार चांद लगा दिया। जिससे साधु-संत से लेकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। स्वामी राघवाचार्य महाराज द्वारा कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया गया। उन्होंने कहा कि जो भी मनुष्य भगवान के झूलन झांकी का दर्शन करता है। उसे चौरासी लाख योनियों में कभी नही आना पड़ता है। वह सर्वथा के लिए आवागमन से मुक्त हो जाता। उसे सांसारिक माताओं की गोद में कभी नही झूलना पड़ता है।स्वामीजी ने कहा कि युगल सरकार के झूलनोत्सव की परंपरा त्रेतायुग से चली आ रही है। पहले हमारे पूर्वाचार्यों ने इस त्रेतायुगीन परंपरा को आगे बढ़ाया। अब हम सब आगे बढ़ा रहे हैं। झूलन सरकार के झूलन की झांकी बहुत ही दिव्य है, जिसका दर्शन करने मात्र से ही अपार पुण्य की प्राप्ति होती है। झांकी में कोशलेस सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर जी महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मंगल भवन पीठाधीश्वर जगद्गुरू अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी महंत कृपालु रामभूषण देवाचार्य, बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, जगन्नाथ मंदिर के महंत राघव दास, रंग महल के महंत राम शरण दास, महंत रामकुमार दास,पूर्व सांसद लल्लू सिंह, राजेश मिश्रा, रमेश मिश्रा सिब्बू, राघवेंद्र मिश्रा अप्पू, मनोज तिवारी, अवधेश जी, स्वामी जी की शिष्या प्रिया गुप्ता सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
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