: नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस जी महाराज का आश्रम दिगंबर अखाड़ा
बमबम यादव
Wed, Jul 23, 2025
नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस जी महाराज का आश्रम दिगंबर अखाड़ा
परमहंस जी के फक्कड़पन, उनकी अपूर्व प्रतिभा, सरलता और प्राणि मात्र के प्रति अपनत्व आत्मीयता के कायल है अयोध्या वासी
दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्रदास महाराज की 22वीं पुण्यतिथि समारोह अपने फलक पर है, मंदिर में पांच दिवसीय रामकथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक संत विजय कौशल जी के श्रीमुख से हो रही
27 को दिगम्बर अखाड़ा में श्रद्धांजलि देगें सूबे के मुखिया गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
अयोध्या। जीते जी अपनी चमक से संत परंपरा को गौरवान्वित करने वाले मंदिर आंदोलन के पर्याय एवं दिगंबर अखाड़ा के महंत रामचंद्रदास जी महाराज की 22वीं पुण्यतिथि समारोह अपने फलक पर है। मंदिर में पांच दिवसीय रामकथा का प्रख्यात कथावाचक संत विजय कौशल जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है।कार्यक्रम मुख्य उत्सव 27 जुलाई को होगा जिसमें सूबे के मुखिया गोरक्षपीठाधीश्वर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी सहित पूरे देश से परमहंस जी के शिष्य परिकर शामिल होगें। मंदिर आंदोलन के पर्याय रहे दिग्गज संत रामचंद्रदास परमहंस जी जैसे यशस्वी संत और 'हिंदुत्व' के क्षितिज पर सर्वाधिक प्रभावी भूमिका का निर्वहन करने वाले व्यक्तित्व की स्मृति सहेजने में दो दशक से अधिक की प्रतीक्षा स्वयं में आश्चर्यजनक रहा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पुण्यसलिला सरयू के तट पर उन्हें अंतिम प्रणाम करने वालों में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी, उप राष्ट्रपति भैरव सिंह शेखावत, उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, संघ प्रमुख केसी सुदर्शन, प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री सहित बड़ी संख्या में सत्ता एवं सियासत के प्रतिनिधियों सहित उनके हजारों प्रशंसक शामिल थे। इसके बावजूद उनकी प्रतिमा स्थापित किए जाने की संभावना उन लोगों के लिए अति सुखद है। दिग्गज संत रामचंद्रदास परमहंस जी की भव्य प्रतिमा पिछले वर्ष स्थापित हो गई है। मंदिर की साज सज्जा दिनप्रतिदिन अपने निखार की ओर अग्रसर है।
परमहंस जी के फक्कड़पन, उनकी अपूर्व प्रतिभा, सरलता और प्राणि मात्र के प्रति अपनत्व आत्मीयता के कायल थे।
नया कलेवर ग्रहण कर रहा रामचंद्रदास परमहंस का आश्रम दिगंबर अखाड़ा इसका श्रेय दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेशदास एवं उनके उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास को जाता है। परमहंस के आदर्शों मूल्यों एवं उनके व्यक्तित्व के प्रशंसकों की दृष्टि से देखें तो वाकई यह प्रयास तृप्त करने वाला है। लंबे समय तक परमहंस जैसे दिग्गज आचार्य की साकेतवास के बाद अवहेलना हैरत में डालती रही। इसके पीछे तकनीकी अड़चन भी थी। सरयू के जिस तट पर 2003 में परमहंस का अंतिम संस्कार उनकी स्मृति अक्षुण्ण रखने की इच्छा अभिव्यक्त की गई थी, किंतु सरयू के जिस स्थल पर उनका अंतिम संस्कार किया गया था, वह सिंचाई विभाग की भूमि थी। इस पर परमहंस का स्मारक संजोना संभव नहीं था। यद्यपि परमहंस के एक अन्य शिष्य नारायण मिश्र ने उस स्थल को संरक्षित किया, जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया था। सात वर्ष पूर्व प्रदेश में योगी सरकार बनने के साथ इस स्थल को संरक्षित करने का प्रयास किया गया, किंतु उनकी प्रतिमा स्थापित करने का प्रयास आगामी सात अगस्त को उनकी 21वीं पुण्यतिथि के अवसर पर फलीभूत हुई। दिगंबर अखाड़ा में प्रवेश करते ही दाहिनी तरफ छह फीट ऊंचा प्रतिष्ठान पर परमहंस जी की प्रतिमा स्थापित की गई है,जो अद्वितीय है। दिगंबर अखाड़ा को भी मिला नया कलेवर परमहंस की प्रतिमा स्थापित किए जाने के साथ संपूर्ण दिगंबर अखाड़ा को भी नया कलेवर प्रदान किया गया है। दिगंबर अखाड़ा में काम अभी भी चल रहा है जो परमहंस जी के 23वीं पुण्यतिथि तक पूर्ण होगा। दिगंबर अखाड़ा के कायाकल्प के लिए प्रदेश सरकार की ओर से अवमुक्त 1.90 करोड़ की राशि से निर्माण के साथ नवनियुक्त महंत रामलखनदास ने अपने स्तर से करोड़ों रुपये की व्यवस्था कर अखाड़ा को पाषाण की दृढ़ इमारत के रूप में विकसित किया है। विगत तीन वर्ष ही दिगंबर अखाड़ा के उत्तराधिकारी नियुक्त किए गए रामलखनदास जिम्मेदारी पाने के दो वर्ष के भीतर ही करीब 25 लाख की लागत से परमहंस की प्रतिमा और उनके मंडप का निर्माण करा प्रशंसा बटोर रहे हैं। उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास जी के संयोजन में लगातार आश्रम का विकास हो रहा है। मंदिर में 22 जुलाई से परमहंस जी की 22वीं पुण्यतिथि समारोह मनाई जा रही है। जिसका संयोजन उत्तराधिकारी महंत रामलखनदास व देखरेख आशुतोष सिंह आशू कर रहें है।
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