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: तपती गर्मी में भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए होता है फूलबंग्ला झांकीः पीपाद्वाराचार्य

बमबम यादव

Tue, May 23, 2023

फूलबंग्ले में विराजें कनक बिहारी सरकार, रामलला व हनुमान जी

अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज। कनक भवन में बिहारी सरकार की, रामजन्मभूमि में भगवान रामलला की व हनुमानगढ़ी में हनुमानजी महाराज आज फूल बंग्ले में विराजें। जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुतः अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। पीपाद्वाराचार्य ने बताया कि धर्मनगरी वृंदावन व अयोध्या में प्रतिवर्ष दिव्य भव्य फूल बंग्ला झांकी का आयोजन होता है। उन्होंने बताया कि झांकी कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार किया गया था। जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए गये थे। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशों से भी आयातित किए गये थे। यह आयोजन जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज वृंदावन और सभी भक्तो द्वारा किया गया।

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