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: श्रीश्याम राम किशोर कुंज मंदिर के झूलनोत्सव का हुआ समापन

बमबम यादव

Sun, Aug 10, 2025
श्रीश्याम राम किशोर कुंज मंदिर के झूलनोत्सव का हुआ समापन हनुमानजी सीताजी और श्रीराम के प्रमुख परिकर हैं, वे संगीत शिरोमणि और भक्ति के आचार्य हैं : महंत महेश दास झूलनोत्सव के अवसर पर बजरंगबली सखि की तरह समर्पित और विनम्र भक्त के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं,हनुमानगढ़ी के सर्वोच्च महंत गद्दीनशीन प्रेमदास जी स्वयं भक्ति के इस मर्म का संवहन करते हैं अयोध्या। सावन का झूलनोत्सव संवाहक होने के साथ अनेक रोचकता से भी युक्त है। सर्वाधिक रोचक यह जानना है कि जो हनुमानजी बल-विक्रम और पुरुषार्थ-पराक्रम के पर्याय हैं, वह दास भाव से श्रीराम और सीता के हिंडोले की डोर खींचते हैं, गीत गाते हैं और भाव विह्वल होते हैं। भक्ति उपासना परंपरा की तो ऐसी ही मान्यता है।रामनगरी की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी के श्रीश्याम राम किशोर कुंज मंदिर जो गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज का स्थान है जहां पर 1994 से लगातार झूलनोत्सव का शबाब सावन शुक्ल एकादशी से रक्षाबंधन तक छाया रहता है। इस महोत्सव की अध्यक्षता स्वयं गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज करते है व संयोजन उनके कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी करते है। मंदिर में उत्सव मनाने का अंदाज ही सबसे अलग है। मंदिर का भव्य झूलनोत्सव भक्तो के आकर्षण का केंद्र बना रहा। झूलनोत्सव का भव्य समापन हो गया है। महंत डा महेश दास अपने गुरुदेव पूज्य गद्दी नशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के आशीर्वाद से अपने पूर्वाचार्यो द्वारा स्थापित सभी परंपराओं का सम्यक अनुपालन कर रहे है। मंदिर में सभी उत्सव, महोत्सव, पर्व ,अनुष्ठान, भंडारा, संतों, महंतो, अतिथियों का सम्मान विधि पूर्वक किये। हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास कहते है भक्ति उपासना में हनुमानजी सीताजी और श्रीराम के प्रमुख परिकर हैं, वे संगीत शिरोमणि और भक्ति के आचार्य हैं और इन गुणों के चलते हनुमान जी झूलनोत्सव से आह्लादित होने वालों में अग्रणी हैं। यद्यपि भक्ति उपासना की मुख्य धारा में हनुमानगढ़ी में हनुमान जी राजा के रूप में विराजमान हैं और श्रीराम तथा सीतापती कारों है जो की प्रधानतम पीठ हनुमानगढ़ी में भले ही बजरंगबली श्रीराम के प्रिय दूत, श्रीराम के ही द्वारा प्रदत्त अधिकार के तहत अयोध्या के पालक-संरक्षक राजा और सेनापति के रूप में शिरोधार्य हों, किंतु झूलनोत्सव के अवसर पर यहां भी बजरंगबली सखि की तरह समर्पित और विनम्र भक्त के रूप में प्रतिष्ठित होते हैं। हनुमानगढ़ी के सर्वोच्च महंत गद्दीनशीन प्रेमदास जी स्वयं भक्ति के इस मर्म का संवहन करते हैं। उन्होंने तीन दशक पूर्व हनुमानगढ़ी के ही परिसर में श्रीश्याम रामकिशोर कुंज की स्थापना की और सावन शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक झूलनोत्सव की परंपरा आगे बढ़ाई। श्रीश्याम रामकिशोर कुंज के झूलनोत्सव का दायित्व उनके शिष्य तथा हनुमत संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डा. महेशदास संभालते हैं। वह बताते हैं कि इस झूलनोत्सव का गहन भाव शास्त्रीय प्रवाहमान रही। समापन बेला में संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत राजेश पहलवान, मामा दास, लवकुश दास, मनीराम दास पहलवान सहित बड़ी संख्या में नागा साधु मौजूद रहें।

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