: हनुमत कथा मंडपम समाज सेवा के लिए सदैव समर्पित:श्रीमहंत प्रेमदास
बमबम यादव
Sat, May 24, 2025
हनुमत कथा मंडपम समाज सेवा के लिए सदैव समर्पित:श्रीमहंत प्रेमदास
श्री हनुमत कथा मंडपम के दो दिवसीय लोकार्पण समारोह का समापन
हजारों संतों ने ग्रहण किया प्रसाद, श्री पंच रामानन्दी निर्वाणी अनि अखाड़ा श्री हनुमानगढ़ी ने किया संतों का अभिनन्दन
हनुमानजी अयोध्या के राजा है, भोग-राग में राजसी वैभव का होता है विशेष ध्यान: डा महेश दास
अयोध्या। राम मंदिर के साथ रामदूत की प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी भी नए शिखर की ओर उन्मुख है। यह सत्य शुक्रवार को परिभाषित हो गया, मौका था मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हनुमानगढ़ी परिसर में नवनिर्मित हनुमतकथा मंडपम का भव्य लोकार्पण किये। दो दिवसीय लोकार्पण कार्यक्रम का समापन आज बड़े ही धूमधाम के साथ किया गया, जिसमें हजारों संतों का विशाल भंडारा किया गया। श्री पंच रामानन्दी निर्वाणी अनि अखाड़ा श्री हनुमानगढ़ी ने आये हुए संतों का विशेष अभिनन्दन किया। संतो के भंडारे को सम्बोधित करते हुए श्री हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज ने कहा कि श्री हनुमत कथा मंडपम समाज सेवा के लिए सदैव समर्पित रहेगा। गद्दीनशीन जी के प्रधान शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास ने कहा कि यह मंडप 17 हजार वर्ग फीट में निर्मित है, जिसमें 5 हजार लोग एक साथ बैठ सकतें है। ग्रेनाइट से आच्छादित चमकदार मंडप प्रथम दृष्टया विमोहित करता है। इसके केंद्र में स्थापित मंच भी मुग्ध करता है। मंच के पृष्ठ में राम दरबार और कथा मंडप की दीवारों पर रामकथा के ही अन्यान्य प्रसंगों पात्रों का नयनाभिराम अंकन श्रीराम और उनके युग को जीवंत करता है। उन्होंने कहा कि कथामंडप के प्रांगण में मंडप से लगा हुआ 16 कमरे का आधुनिक साज-सुविधा युक्त अतिधिगृह है और मंडप का बाहा प्रभाग पार्किंग तथा उद्यान के रूप में विकसित किया जायेगा। महंत डा महेश दास कहते है हनुमानजी अयोध्या के राजा है, इसलिए भोग-राग में राजसी वैभव का होता है विशेष ध्यान। भोग-राग में राजसी वैभव का ध्यान रखा जाता है। सुबह विधि-विधान से पूजा-आरती के बाद हनुमानजी को बाल भोग के रूप में भी से निर्मित सवा किलो इमरती और पांच किलो फलों का भोग लगता है। मध्याह्न भी से ही बनी 40 किलो आटा की पूड़ी, दो तरह की सब्जी, पकौड़ी, हलवा का भोग लगता है। सायंकाल भोग की ही वनी विशेष किस्म की सवा-डेढ़ किली नमकीन अथवा भुना काजू, चूड़ा, चना, मूंगफली का बाल भोग और रात में दो किलो रबड़ी, इतनी ही इमरती एवं पांच किलो दूध तथा किशमिश काजू से युक्त तस्मई का भोग लगाया जाता है। बुधवार के दिन हनुमानगढ़ी की रसोई में दे सी लोगों के लिए दाल, चावल, पूड़ी, सब्जी एवं दही का विधि-विधान से भंडारा भी होता है। हनुमानगढ़ी के संतों के लिए प्रति माह 50 क्विंटल गेहूं एवं 10 क्विंटल दाल की व्यवस्था होती है। सागरिया पट्टी के श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास कहते है इस हनुमत कथा मंडपम की आवश्यकता श्री हनुमानगढ़ी को विशेष रुप से थी। एक साथ हमारा पूरा अखाड़ा बैठकर अपनी व्यवस्थाओं पर विचार विमर्श कर सकता है हमारी पंचायती बैठक के साथ साथ भंडारे में बहुत उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि अब कथा प्रवचन आदि धार्मिक अनुष्ठान भी इस मंडपम में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्री पंच रामानन्दी निर्वाणी अनि अखाड़ा श्री हनुमानगढ़ी समाज सेवा में सदैव तत्पर रहता है। सनातन धर्म की ध्वज पताका फहराने के लिए हमारा अखाड़ा हमेशा आगे रहा है और आगे रहेगा भी। भंडारे में निर्वाणी अनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, बासंतिया पट्टी के श्रीमहंत रामचरण दास, महासचिव महंत नंदराम दास, महंत सत्यदेव दास, सरपंच महंत रामकुमार दास, महंत राजेश दास पहलवान,महंत बलराम दास, हनुमान बाग के श्रीमहंत जगदीश दास, रसिक पीठाधीश्वर श्रीमहंत जन्मेजय शरण, हनुमान किला के महंत परशुराम दास, पुजारी रमेश दास, हेमंत दास, राजू दास, सूर्यभान दास, पहलवान मनीराम दास, लवकुश दास, उपेंद्र दास, आखाड़े के मुख्तार अजय श्रीवास्तव, महंत संजय दास जी के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव, कैसरगंज के लोकप्रिय नेता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, संजय शुक्ला, पेड़ा महाराज, प्रियेश दास, अयोध्या प्रभारी महेंद्र त्रिपाठी, बृजभूषण शरण सिंह के प्रतिनिधि नीलेश सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
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