: अक्षय तृतीया को हनुमानजी पहुंचेगे रामलला के दरबार, करेंगे विशेष पूजन
बमबम यादव
Fri, Apr 25, 2025
अक्षय तृतीया को हनुमानजी पहुंचेगे रामलला के दरबार, करेंगे विशेष पूजन
शाही जुलूस के माध्यम से निकलेगी अयोध्या राजा हनुमानजी की शाही सवारी, गद्दीनशीन करेंगे प्रतिनिधित्व
हनुमानगढ़ी के 52 बीघा परिसर से बाहर निकलने वाले तीसरे गद्दीनशीन होगें श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज
अजर-अमर के वरवन से युक्त हनुमान जी आज भी हनुमानगढ़ी में सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं
हनुमान जी की प्रेरणा पर रामलला के दर्शन के लिए जाऐंगे श्रीगद्दीनशीन जी महाराज: महंत डा महेश दास
अयोध्या। पौराणिक मान्यता के अनुसार लंका विजय के बाद श्रीराम के साथ अनेक वानर वीर भी श्रीराम के साथ अयोध्या आए। इनमें स्वाभाविक रूप से हनुमान जी भी शामिल थे। माता सीता की खोज से लेकर रावण के विरुद्ध सामरिक अभियान में हनुमान जी ने अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनकी इसी योग्यता के अनुरूप श्रीराम ने राजप्रसाद के आग्नेय कोण पर हनुमान जी को अयोध्या के रक्षक के रूप में स्थापित किया। यह भी मान्यता है कि अजर-अमर के वरवन से युक्त हनुमान जी आज भी यहां सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं। एक मार्च 1528 को राम मंदिर तोड़े जाने जैसी घटनाओं के चलते घर-परिवार त्याग कर राम भक्ति में लीन रहने वाले विरक्त वैष्णव आचार्यों ने 17वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में जिन तीन अखाड़ों का गठन किया, उनमें से एक निर्वाणी अखाड़ा भी था। हनुमानगढ़ी इस अखाड़ा के विरक्त साधुओं के केंद्र के रूप में स्थापित हुई।
हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन की करीब 200 वर्ष की परंपरा में यह पहला अवसर होगा, जब अक्षय तृतीया पर मुख्य श्रीमहंत गद्दीनशीन प्रेमदास जी महाराज हनुमानजी के प्रतिनिधि के रूप में भगवान रामलला का दर्शन करने जाएंगे। उनके साथ संपूर्ण हनुमानगढ़ी का प्रतिनिधित्व भी होगा।इसमें हनुमानजी का शाही निशान सहित सभी चार पट्टियों के महंत, सरपंच और अन्य संत- महंत शामिल होंगे। हनुमानगढ़ी की आचार संहिता में गद्दीनशीन के लिए इस पीठ के 52 बीघा परिसर से बाहर जाने पर रोक है और उसके मूल में यही भावना है कि वह हनुमानजी के मुख्य अनुचर व सेवक के रूप में सतत मौजूद रहेंगे।
गद्दीनशीन श्रीमहंत सहित संतों-महंतों का जुलूस शोभा यात्रा के रूप में सबसे पहले सुबह मां सरयू के पावन तट जाएगा। सरयू नदी में स्नान के बाद धूमधाम से गाजे-बाजे के साथ शोभा यात्रा क्षीरेश्वरनाथ मंदिर के सामने गेट नंबर 3 से राम मंदिर परिसर में दर्शन के लिए प्रवेश करेगी। इस दौरान मार्ग के दोनों ओर करीब सौकड़ों स्थानों पर पुष्प वर्षा कर इस ऐतहासिक यात्रा का स्वागत होगा।इस बात पर भी मंथन चल रहा है कि हेलीकाप्टर से शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा की जाए। रामलला के दर्शन के दौरान गद्दीनशीन जी भगवान रामलला का 56 भोग भी लेकर जाऐंगे। यह विशेष तौर पर शुद्ध देशी घी से बना होगा।श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज हनुमानगढ़ी के अब तक के इतिहास में ऐसे तीसरे गद्दीनशीन होंगे, जो 52 बीघा की परिधि से बाहर जाऐंगे। 4 दशक पूर्व तत्कालीन गद्दीनशीन महंत दीनबंधु दास को गंभीर रूप से घायल होने पर चिकित्सालय ले जाना पड़ा था, तो इसके पहले रहे गद्दीनशीन श्रीमहंत रमेश दास जी को भी चिकित्सा के लखनऊ चिकित्सालय ले जाना पड़ा था। इस पर हनुमानगढ़ी की निर्णायक पंचायत को आपत्ति हुई थी और अंततः तत्कालीन गद्दीनशीन को अति आकस्मिकता व मानवीय आधार पर छूट मिल सकी थी।
गद्दीनशीन जी के उत्तराधिकारी हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास जी ने कहा कि हनुमान जी की प्रेरणा पर रामलला के दर्शन के लिए जाऐंगे श्रीगद्दीनशीन जी महाराज। वर्तमान गद्दीनशीन का मामला अलग है। उन्हें तो हनुमानजी ने प्रेरित कर अपनी इच्छा से अवगत कराया। गत तीन माह से श्री गद्दीनशीन जी महाराज हनुमानजी की इच्छापूर्ति का प्रयास करने लगे। पहले उन्होंने शिष्यों से विचार साझा किया। इसके बाद बात पंचायत तक पहुंची। पंचायत ने गत 21 अप्रैल को बैठक कर गद्दीनशीन जी को अनुमति प्रदान की। श्री हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास जी ने बताया कि गद्दीनशीन जी का हनुमानजी के शाही निशान के साथ रामलला को दर्शन करने जाने का विषय हनुमानगढ़ी की भावना व मर्यादा के अनुरूप है और पंचायत अपने निर्णय से अभिभूत है। इसके लिए अक्षय तृतीया यानी 30 अप्रैल की तारीख नियत की गई है। आस्था की यह गौरवमय यात्रा निर्धारित तिथि पर सुबह हनुमानगढ़ी से शुरू होकर पुण्यसलिला सरयू तट तक जाएगी और वहां स्नान के बाद रामजन्मभूमि पहुंचेगी। श्री गद्दीनशीन जी लगभग आठ साल बाद हनुमानगढ़ी परिसर से बाहर निकलेंगे।गद्दीनशीन जी के शिष्य मामा दास जी ने बताया कि यह यात्रा शोभायात्रा के रूप में होगी। यह परंपरा भी है कि हनुमानजी का शाही निशान शोभायात्रा के रूप में ही संचालित होता है। सोने-चांदी के तारों से निर्मित हनुमान जी का निशान 20 से 25 फीट ऊंचे और 20-25 किलो ग्राम वजनी चांदी के दंड पर स्थापित होता है।
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