Wednesday 4th of November 2026

ब्रेकिंग

श्रीराम एवं मां सीता को परमाराध्य एवं उनके दूत हनुमान जी को परमाचार्य के रूप में स्वीकृत- शिरोधार्य

दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

भक्ति आंदोलन मंच न्यास का विस्तार, महंत परशुराम दास बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बाल योगी रामदास को प्रदेश की कमान

सर्किट हाउस में हुआ स्वागत, बादल बोले- संगठन को मिलेगी नई मजबूती

हनुमानगढ़ी स्थित आश्रम में जुटे संत-महंत और राजनीतिक हस्तियां, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके थे आश्रम

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है: इन्द्रदेवजी सरस्वती जी

बमबम यादव

Sat, Apr 9, 2022

प्रातः श्री राम कृपा महायज्ञ होगा, 12 बजे रामलला का भव्य अवतरण महोत्सव धूम-धाम से मनाया जाएगा

अयोध्या। श्री रामजन्मोत्सव के पावन अवसर पर कनक महल में संत इन्द्रवदेवजी सरस्वती जी के श्रीमुख से रामकथा की अमृत वर्षा हो रही है।कथा के आज अष्टम दिवस में कथा का प्रारंभ गुरु की महिमा बताते हुए किया। जब तक गुरु द्वारा बताए गए चरित्र शिष्यों के आचरण में नहीं आएगा तब तक गुरु के सिद्धांतों की रक्षा नहीं हो सकती। सीताराम जी के चरित्र का आचरण करना ही होगा। उन्होंने कहा कि विवाह में सदा 3 - 4 दिन तक संन्यासी, धर्मात्मा, ज्ञानी को बुलाओ और 7 दिन की कथा सुनो। यह ज्ञान देनेवाले एकमात्र सन्त जी ही हैं। सन्त जी आगे बताते हैं कि सैकड़ों लोग तो तीर्थ में केवल घूमने-खाने-पीने-टहलने के लिए आते हैं। तीर्थ में आने के लिए पुण्य लगता है, कभी-कभी सन्तों और गुरुदेव की कृपा से तीर्थ करने का सौभाग्य मिलता है। गुरु को दूध की मलाई की तरह ऊपर ही रखें तो जीवन में सदा आनंद रहेगा। गुरु को घर में प्रार्थना पूर्वक विश्राम और भोजन आदि सबके लिए कहना चाहिए। श्री राम भगवान 26 वर्ष की आयु में भी माता कौशल्या जी के साथ शयन करते थे, धन्य है वह संस्कृति, ऐसा बालक अपने कुल का सदा नाम ऊंचा करेगा। स्वामीजी ने बताया कि वेद प्रमाणित बात है जब तक आँचल में दूध है तब तक बच्चा गर्भ में ही है ऐसा समझकर पालना चाहिए। राम तो रामायण से भी पहले से हैं अतः उनका चरित्र भी उतना ही पहले का है।
आयुर्वेदाचार्य संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज ने बताया कि आटा और रोटी हो तो उसे खानेवाला का स्वास्थ्य कभी खराब नहीं होता। विवाह का बंधन ऐसा है कि हमें पीछे के जीवन का नहीं पूछना चाहिए। जो व्यक्ति मां बाप को प्रतिदिन प्रणाम करता है, उसे अकाल मृत्यु नहीं आती, उसे सर्पदंश नहीं होता। राम की सेवा निस्वार्थ भाव से करो, तो आपके बुढ़ापे और अंतिम जीवन का इंतज़ाम स्वय राम जी कर देंगे। लक्ष्मी सदा राम जी की पत्नी बनती हैं और महालक्ष्मी दया बनती हैं। जो एकदम गरीब था और अचानक करोड़पति हो जाए तो उसे दानीदाता बन जाना चाहिए अन्यथा बहुत जल्दी कंगाल भी हो जाएगा। बकरे का एक भी गुण अच्छा नहीं है, उसे खाने से केवल माँस बढ़ता है, तब भी लोग उसे खाते हैं। देश को चलानेवाला कोई भी हो लेकिन हमारा देह चलानेवाला राम ही होना चाहिए। मन, बुद्धि, चित्त, अहंकार सभी आत्मा के साथी हैं, लेकिन शरीर में उनका स्थान कहाँ है यह किसी को नहीं पता। जिनके पति वानप्रस्थ में संन्यास लेकर जीवन व्यतीत करना चाहते हैं, ऐसे पतियों की पत्नियों को उन्हें ऐसा करने में साथ देना चाहिए।
यह देश वीरांगनाओं का है, यहाँ रानी लक्ष्मीबाई ने 5 मंजिला किले से अंग्रेज़ों पर घोड़े पर सवार होकर आक्रमण किया था। और संत जी रानी लक्ष्मीबाई को स्मरण करते हुए गीत गाया "रेशमी सलवार कुर्ता जाली का, रूप सहा न जाए झाँसीवाली का" ! भरत शत्रुघ्न कश्मीर आवेद विद्या सीखने के लिए गए थे। किवाड़ों में दरार पड़ने लगे, आँगन की तुलसी सूख गई, गर्भवती महिलाएं भी ऐसी स्थिति में अपने भगवान श्री राम जी के साथ वनवास में उनके साथ जाना चाहती थीं। घोड़ों के आँसू नहीं रुक रहे थे। आगे बताया कि मित्र, पत्नी और धन की पहचान आपत्ति काल में होती है। केवट से कुछ सीखना चाहिए, नाविक को साधुओं से भी पैसा नहीं लेनी चाहिए । संत जी ने आग्रह करते हुए कहा कि शिष्यों को चाहिए कि गुरु से भेंट होने पर संसार के प्रश्न न पूछते हुए आत्मा के कल्याण की चर्चाएं करनी चाहिए तभी समय सफल है समझो।
ज्ञात हो कि 10 अप्रैल को प्रातः 7 बजे श्री राम कृपा महायज्ञ का आयोजन किया गया है। कथा का समय बदलकर  प्रातः 10 बजे किया गया है तथा ठीक 12 बजे रामलला का अवतरण महोत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाएगा।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें