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सृष्टि एक अनुशासित और मेधावी छात्रा रही: प्रबंध निदेशक रवि यादव 

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संतों के सान्निध्य में वैष्णव परंपरा के अनुसार विधिवत अनुष्ठान कर अमित कुमार दास को कंठी, चादर और तिलक देकर महंत पद की

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: श्रीराम विवाह महोत्सव मनाने का अंदाज अपने आप में निराला है

बमबम यादव

Sun, Dec 5, 2021

रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार दशरथ राज महल बड़ा स्थान का श्रीराम विवाह महोत्सव मनाने का अंदाज अपने आप में निराला है। महंत जी दशरथ की भूमिका में दोनो हाथों से न्यौछावरी लुटाते हुए अपने आराध्य का पावन उत्सव मनाते है। पूरा मंदिर इस महोत्सव में शामिल होकर विवाह के भाव रुपी रस से सराबोर होकर खुद को आनंदित महसूस कर रहे है। यह पूरा आयोजन बिंदुगाद्यायाचार्य जी महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन व सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी के देखरेख में सम्पादित हो रहा है। मंदिर में व्यासपीठ से श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हरिधाम गोपाल पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य कर रहे है।रामदिनेशाचार्य जी कहते है कि जो दुनिया को मिटाना चाहता है वह स्वंय मिट जाता है। हिरण्यकश्यप प्रहलाद को मिटाना चाहता था स्वंय मिट गया। कुंभकर्ण इन्द्रासन मांगना चाहता था सरस्वती जी की अनुकंपा से निद्रासन मांग लिया। विभीषण ने भगवान के चरणों में अनुराग मांगा। लंका में एक हरि मंदिर भी था जहां विभीषण भगवत पूजन किया करता था।श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के पुनीत अवसर पर बिन्दुगाद्याचार्य पूज्यपाद स्वामी श्री देवेन्द्रप्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में बड़ास्थान में हो रही श्रीरामकथा रस का भक्तों को पान कराते हुये रामदिनेशाचार्य महाराज जी कहते हैं कि अपने भक्त प्रहलाद की वाणी को सत्य करने के लिए प्रभु को खंभे में प्रकट होना पड़ा। भगवान अपने भक्त की वाणी को सत्य करने एवं उसकी रक्षा के लिए सतत प्रतिबद्ध रहते हैं। व्यास जी कहते हैं भगवान का भजन करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। सप्त ऋषियों से माँ पार्वती ने कहा मैं आपके कहने पर गुरूदेव के वचन नहीं टाल सकती। जो गुरू की बात नहीं मानता वह भक्त नहीं हो सकता। देवर्षिनारद जी पार्वती जी के गुरू हैं। कथा श्रवण करने से अभिमान चला जाता है। इस पावन अवसर पर बड़ी संख्या में रामकथा श्रोता संत-महांत एवं भक्त श्रीरामकथामृत का पानकर स्वंय को कृतार्थ कर रहे हैं।

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