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: राम-कृष्ण में है शाश्वत संबंध: महंत रामेश्वरी शरण

बमबम यादव

Fri, Aug 19, 2022

रामनगरी के कनक भवन,रामजन्मभूमि, हनुमान बाग, श्रावण कुंज समेत सौकड़ों मंदिरों में आज मनाया जायेगा जन्माष्टमी

अयोध्या। जग में सुंदर हैं दो नाम- चाहे कृष्ण कहो या राम। जी हां, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भले ही मथुरा में हुआ हो लेकिन अयोध्या से भी काफी गहरा नाता था। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण कनक भवन में महाराज विक्रमादित्य द्वारा संरक्षित शिलापट्टों से देखा जा सकता है। धार्मिक शास्त्रों में दर्ज है कि माता सीता को कनक भवन मुंह दिखाई में मिला था।करीब 2 हजार वर्ष पूर्व महाराजा विक्रमादित्य ने भी कनक भवन का जीर्णोद्धार कराया था। उस दौरान शिलापट्टों को संरक्षित करवाया था। संरक्षित शिलापट्टों को देखें तो साफ पता चलता है कि भगवान श्री कृष्ण जरासंध का वध करने के बाद अयोध्या आए थे। इस दौरान उन्होंने कनक भवन को देखा, जो एक टीले की शक्ल में सिमट कर रह गया था। शिलापट्टों पर लिखे श्लोकों से स्पष्ट हो जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस शिला पर आनंद का अनुभव किया। इसके बाद उन्होंने कनक भवन के जीर्णोद्धार कराने का फैसला किया था। ऐसा कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने ही कनक भवन का जीर्णोद्धार कराया और वहां पर राम और माता सीता की मूर्ति की स्थापना भी की। वहीं, पौराणिक मान्यता के अनुसार, कनक भवन राजा दशरथ ने रानी कैकेई को प्रदान किया था, जिसे बाद में रानी कैकेई ने यह भवन माता सीता को मुंह दिखाई में दिया था।

रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज मंदिर में जन्माष्टमी पर्व बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाएगा। इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। यह महोत्सव महंत रामरुप शरण महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर की वर्तमान महंत रामेश्वरी शरण के संयोजन में मनाया जाएगा। महंत रामेश्वरी शरण ने बताया कि राम और कृष्ण का एक दूसरे के साथ सास्वत संबंध है। दोनों भगवान विष्णु के अवतार के पुरुष हैं। महंत रामेश्वरी शरण जी बताती हैं कि पूरे जग में दो ही नाम चलते हैं। एक तो भगवान राम और दूसरे भगवान कृष्ण। इन दोनों ने राक्षसों के नाश के लिए पृथ्वी पर अवतार लिया था। उन्होंने कहा कि श्रावण कुंज मंदिर में सारे उत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। श्रीरामनवमी व श्री कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही उत्साह से मनाते है। पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। शुक्रवार को मध्य रात्रि भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।

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