: माँ सरयू जयंती पर दीपों से जगमग हुई धारा, उतारी गई आरती
बमबम यादव
Wed, Jun 15, 2022
माँ सरयू जयंती मनाने के लिए घाटों पर पहुंचे अयोध्या के साधु संत और नगरवासी
आंजनेय सेवा संस्थान के तत्वाधान मनाई गई सरयू मां की जयंती, सजी झाकियां, 5100 दीपों से की गई 'पुण्यसलिला' की महाआरती
दिव्य मां सरयू आरती सेवा संस्थान ने फूलबग्लें की झांकी सजा, उतारी 1100 बत्ती की आरती
अयोध्या में सरयू जयंती पर पुण्य सलिला के तट पर आस्था की इंद्रधनुषी छटा बिखरी। विधि- विधान से पुण्यसलिला का पूजन किया गया। सरयू तट पर झांकी सजी और जगह-जगह पुण्यसलिला की हजारों दीपों से आरती की गई। राम नगरी अयोध्या में जेष्ठ पूर्णिमा पर माँ सरयू की जयंती बड़े धूम धाम से मनाई गई। जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मां सरयू की पवित्र धारा में स्नान कर आरती उतारी। वहीं देर शाम सरयू घाट पर बड़ी संख्या में लोग दीपदान भी किए।
आंजनेय सेवा संस्थान के तत्वाधान में इस वर्ष भी सहस्त्रधारा घाट पर तीन दिवसीय अवध सरयू जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम के संयोजक महंत शशिकांत दास ने बताया कि तीन दिवसीय कार्यक्रम का आज भव्य समापन होगा। व्यासपीठ से भक्तों को कथारस का पान करा रहें जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज। आज मां सरयू की जयंती बहुत ही भव्य रुप से मनाई गई। पूरे घाटों को फूलो से सजाकर असंख्य दीपों से जगमग किया गया। इसके बाद मां की 5100 बत्ती की महाआरती उतारी गई।कार्यक्रम के संयोजक महंत शशिकांत दास ने कहा कि आज ही के दिन मां सरयू का अवतरण हुआ था। पवित्र पावन माँ सरयू की भव्य आरती का बड़ा अद्भुद दृश्य होता है। ग्रंथों में भी मां सरयू का विशेष वर्णन किया गया है माना जाता है कि महाराजा रघु की प्रार्थना पर महर्षि वशिष्ठ ने तपस्या करके ब्रह्मदेव को प्रसन्न कर मां सरयू को पृथ्वी पर अवतरित कराने का वरदान प्राप्त किया था। वहीं वर्णन में कहा गया है कि जब ब्रम्हदेव सृष्टि की रचना कर रहे थे तो उससे पहले ही ब्रह्मदेव ने भगवान विष्णु की तपस्या की थी और भगवान विष्णु ब्रह्म देव को दर्शन दिया था। दर्शन के बाद ब्रम्हदेव की तपस्या को देख भगवान विष्णु इतना खुश हो गए थे कि उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े थे। तभी ब्रह्मा जी ने ऑसुओं को अपने हाथों से रोक उसे मानसरोवर पर स्थापित किया था।इसीलिए सरयू को नेत्रजा भी कहा जाता है। कार्यक्रम के संयोजक महंत शशिकांत दास व पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया।कार्यक्रम में दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के महंत बिंदुगद्यायाचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य,जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, महंत गिरीश दास, महंत कृपाल रामभूषण दास, कैसरगंज के लोकप्रिय सांसद बृजभूषण शरण सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
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