: भजन,सेवा और तपस्या का प्रमुख केन्द्र है रसमोद कुंज
बमबम यादव
Mon, Dec 6, 2021
बिरौली सरकार व भैया जी की पुण्यतिथि पर संत करेंगे नमन
अयोध्या। वैष्णो नगरी अयोध्या संतो की सराय के रूप में जानी जाती है और यहा आने को भजनानंदी संत हुए हैं जिन्होंने भक्ति और प्रेम रूपी शस्त्र के माध्यम से बड़े-बड़े विद्वानों को भी अपना लोहा मनवा दिया। यह भूमि भजन सेवा और तपस्या के लिए जानी जाती है कौन क्या है यह महसूस नहीं होता लेकिन तपस्या और भजन के बल पर लोहा मनवाने वाले संतों की कमी भी अयोध्या में नहीं है। अगर कोई प्रेम से मांगता तो सब कुछ न्योछावर कर देने वाली यह नगरी बड़े-बड़े विद्वानों के अहम को भी चकनाचूर किया है,पर इन्हीं संतो की मणि माला में रसमोद कुंज अनंत श्री से विभूषित साकेत वासी श्री बिरौली सरकार और साकेत वासी श्री सियाछबीली शरण जी महाराज भैया जी की भी गणना होती है। आज भी श्री महाराज द्वारा रचित पद का गाना समय-समय पर आपको सुनाई देगा चाहे वह सावन झूला मेला हो या प्रभु श्री राम का विवाह उत्सव।
रसमोद कुंज के वर्तमान महंत रामप्रिया शरण गिरधारी जी महाराज ने बताया कि इस वर्ष अनंत श्री बिरौली सरकार की 37 वी और श्री महंत सियाछबीली शरण भैया जी की आठवीं वार्षिक भंडारा महोत्सव 7 दिसंबर को मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि दोनों सरकार प्रभु श्रीराम के अनंत भक्त थे और हमेशा उन्हीं के रस में लीन होकर के पदों का गान किया करते थे आज भी उनके द्वारा रचित पद अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे देश के धार्मिक उत्सव में गाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों सरकार सेवा को ही धर्म मानते थे और सेवा की ही शिक्षा देते थे उनका मानना था की सेवा से ही प्रभु को प्राप्त किया जा सकता है इससे सरल मार्ग और कोई नहीं है।
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